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शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

एक देशगान -उस मिट्टी को सौ बार नमन

श्रीराम जी 


एक देशगान -उस मिट्टी को सौ बार नमन 


जिस मिट्टी में हम जन्म लिए 

उस मिट्टी को सौ बार नमन.

गंगा, यमुना, नर्मदा और 

सरयू से पावन रहे वतन.


कुछ देश विरोधी हर युग में 

बन जाते असुर महादानव,

फिर से साधो सारंग राम 

बनकर इस धरती पर मानव,

ताड़का, सुबाहु, मारिचि यहाँ 

फिर रोक रहे हैं यज्ञ भजन.


फिर शक्ति विदेशी भारत में 

साधने लगी जयचंदों को,

हे चन्द्रगुप्त, चाणक्य उठो 

कर दो समाप्त घनानंदों को,

निर्भय होकर आँधी रोको 

फिर रहे राष्ट्र में चैन अमन.


फिर महासूर्य को दीप समझ 

कुछ लोग बुझाने आए हैं,

फिर षड़यंन्त्रों से दिल्ली पर 

कुछ काले बादल छाए हैं 

मौसम की कोशिश यही रहे 

फिर इंद्रधनुष से खिले गगन.

आचार्य चाणक्य 


जयकृष्ण राय तुषार 

प्रयागराज