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मंगलवार, 31 मार्च 2026

एक गीत -धूप के कटोरे में चाँदनी सजाना

  

चित्र साभार गूगल 
युद्ध किसी के लिए अच्छा नहीं होता.आतंक और युद्ध दोनों मानवता के विरुद्ध अपराध हैं.दुनिया को युद्ध में धकेलने वाले महानायक नहीं बन सकते. ईरान और अमरीका दोनों को विश्व शांति की प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए. आतंक और जेहाद फैलाने वाले देशों पर कड़ा प्रतिबंध लगना चाहिए.प्रेम और शांति ही मानवता की रक्षा कर सकते हैं. सृजन और संहार ईश्वर का कार्य है महाकाल के कार्य में मनुष्य को दखल नहीं देना चाहिए. विश्व में शांति ही सबसे सुन्दर विकल्प है.

दुनिया को युद्ध से बचाना 


बेला के 
फूलों से 
केश को सजाना.
ओ अशांति 
दुनिया को 
युद्ध से बचाना.

चिड़ियों के 
पँख बचे 
नदियों में धार रहे,
बारूदी गंध 
मिटे 
दुनिया में प्यार रहे,
ओ वंशीधर 
अपनी 
बॉसुरी बजाना.

राग बचे 
रंग बचे 
पानदान पान रहे,
पूरब से 
पश्चिम तक 
मोहक मुस्कान रहे,
झुकी हुई
नज़रों में 
आग मत सजाना.

इंद्रधनुष 
क्षितिजों पर 
सावन में आएंगे,
झील -ताल 
भींगेंगे 
प्रेम गीत गाएंगे,
मिलने को 
ढूंगेंगे 
लोग फिर बहाना.

दम्भ लिए
चेहरों  पर 
कोमल सा भाव खिले,
हिंसा की 
पगडण्डी को 
फिर से बुद्ध मिले,
धूप के 
कटोरे में 
चाँदनी सजाना.

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

चित्र साभार गूगल 



गुरुवार, 19 मार्च 2026

सुश्री हर्षिका सिंह मुख्य विकास अधिकारी प्रयागराज को पुस्तक भेंट

 आज प्रयागराज स्थित विकास भवन जाकर होनहार I. A. S. सहज सरल मृदुभाषी अधिकारी सुश्री हर्षिका सिंह से मिलकर अपना ग़ज़ल संग्रह भेंट किए. हर्षिका जी इंजिनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं. आप सभी का दिन शुभ हो.

सुश्री हर्षिका सिंह I. A. S
मुख्य विकास अधिकारी प्रयागराज 
को पुस्तक भेंट 

मुख्य विकास अधिकारी प्रयागराज 
सुश्री हर्षिका सिंह I. A. S


रविवार, 15 मार्च 2026

पद्मश्री श्री अनूप जलोटा जी मेरा ग़ज़ल संग्रह पढ़ते हुए

  अद्भुत क्षण महान भजन गायक आदरणीय श्री अनूप जलोटा जी मेरी किताब पढ़ते हुए. और प्रसंशा करते हुए आदरणीया श्रीमती दीप्ती चतुर्वेदी जी के प्रति हृदय से कृतज्ञ हूँ जिनकी कृपा मुझ पर रहती है. आप सभी का दिन शुभ हो 

पद्मश्री अनूप जलोटा जी मेरा ग़ज़ल संग्रह 
पढ़ते हुए 


यह तसवीर 26-03-3026 को होटल यात्रिक 
प्रयागराज में ली गयी है 




रविवार, 1 मार्च 2026

एक पुराना गीत -टोकरी भर कर गुलाबी फूल

  

कवि
 जयकृष्ण राय तुषार 

चित्र -साभार गूगल 


एक गीत -

टोकरी  भरकर  गुलाबी फूल लाऊँगा 

टोकरी 
भरकर 
गुलाबी फूल लाऊँगा |
इस 
हवा को मैं 
सुगन्धों से सजाऊँगा |

हँसो चम्पा !
डरो मत 
यह समय बीतेगा ,
आदमी 
इस वायरस से 
जंग जीतेगा ,
मैं -तुम्हारे
वायलिन
पर गीत गाऊँगा |

हरे पत्तों 
से हवा 
माँगो नदी से जल ,
लौट आयेंगे 
गगन में 
वृष्टि के बादल ,
इसी 
माटी पर 
हरेपन को सजाऊँगा |

फिर हँसेंगे  
बाजरे 
और धान खेतों में ,
दौड़ते 
होंगे हिरन 
दिनमान रेतों में  ,
चाँदनी 
में फिर 
तुम्हें किस्से सुनाऊँगा |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 
चित्र -साभार गूगल