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| कवि जयकृष्ण राय तुषार |
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| चित्र -साभार गूगल |
एक गीत -
टोकरी भरकर गुलाबी फूल लाऊँगा
(हिन्दी के महत्वपूर्ण कवियों का ब्लॉग)
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| कवि जयकृष्ण राय तुषार |
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| चित्र -साभार गूगल |
एक गीत -
टोकरी भरकर गुलाबी फूल लाऊँगा
आज बहुत आत्मीय मित्र श्री विनोद कुमार बरनवाल जी प्रधान न्यायधीश फेमिली कोर्ट जनपद बलरामपुर एक वैवाहिक समारोह में प्रयागराज आए तो मुलाक़ात हुईं फिर सुबह मनकामेश्वर जी का दर्शन हुआ. बहुत ही आनंददायक दिन रहा.
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| श्री विनोद कुमार बरनवाल प्रधान न्यायधीश जनपद बलरामपुर |
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| श्री विनोद कुमार बरनवाल प्रधान न्यायधीश फेमिली कोर्ट बलरामपुर |
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| यमुना जी का दृश्य |
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| यमुना जी का दृश्य |
आज बेहतरीन संयोग था आदरणीय कृष्ण कुमार यादव जी प्रतिष्ठित लेखक एवं ब्लॉगर जो भारतीय डाक सेवा में पोस्ट मास्टर जनरल हैं उनसे मुख्य डाकघर के गेस्ट हाउस में मुलाक़ात हुई और मैंने लोकभारती से प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह भेंट किया. आदरणीय श्री के. के. यादव जी सहज व्यक्तित्व के धनी हैं. उनसे मिलना बहुत ही सुखद लगता है. फोटो भाई श्री अभय यादव जी ने लिया उनके प्रति हृदय से आभार.आप सभी का दिन शुभ हो.
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| श्री कृष्ण कुमार यादव जी पोस्ट मास्टर जनरल अहमदाबाद एवं लेखक /ब्लॉगर को पुस्तक भेंट |
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| श्री के. के. यादव जी पोस्टमास्टर जनरल एवं प्रतिष्ठित लेखक |
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| आदरणीय श्री रामनरेश त्रिपाठी पिंडीवासा जी को पुस्तकभेंट |
आज दिनांक 21-02-2026 को आदरणीय श्री राम नरेश तिवारी पिंडीवासा जी जिला प्रबंधक /उपमहाप्रबंधक से. नि. खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय भारत सरकार. वर्तमान में सदस्य हिन्दी सलाहकार समिति वाणिज्य मंत्रालय एवं पंचायती राज्य मंत्रालय भारत सरकार व नगर प्रधान केंद्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद प्रयागराज के आवास पर अपनी पुस्तक /ग़ज़ल संग्रह *सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है *की एक प्रति सम्मानपूर्वक भेंट किए. इस अवसर पर पिंडीवासा जी से आशीर्वाद प्राप्त कर प्रसन्नता मिली उनके द्वारा मेरे जीवन में रचना के क्षेत्र में उत्तरोत्तर वृद्धि का आशीष भी मिला. आप सभी का दिन शुभ हो.
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| पिंडीवासा जी को पुस्तक भेंट |
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| चित्र गूगल से साभार |
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| चित्र -गूगल से साभार |
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| चित्र -गूगल से साभार |
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| महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला |
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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -नदी किनारे मौसम का
जंगल काटे गए
धुंआ
शहरों के नाम हुआ.
अंधाधुंध
तरक्की का
कैसा अंजाम हुआ.
वन -बस्ती में
सन्नाटा
चिड़ियों के गीत नहीं,
नदी किनारे
मौसम का अब
कोई मीत नहीं,
चौड़ी सड़के
फिर भी हर दिन
रस्ता जाम हुआ.
कथा सुनाती
शामें
महुआ चुनती भोर नहीं,
कोहबर
गाते मौन
कहीं गीतों का शोर नहीं.
याद नहीं
कब गली
मोहल्लों से जै राम हुआ.
कवि
जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र साभार गूगल |
एक ताज़ा गीत -गीत, पपीहा, बांसुरी
गीत, पपीहा
बांसुरी
वासंती श्रृंगार.
प्रेमगीत
लिखने लगा
फूलों में इतवार.
पीली -नीली
चिट्ठियां
वन में पढ़े पलाश,
नदी किनारे
खाट पर
मौसम खेले ताश,
सुबह
हवा में उड़ रहे
मेजों से अख़बार.
तन्हा बैठे
फूल को
फिर तितली की याद,
मौन मुखर
करने लगा
आँखों से संवाद,
राधे राधे
बोलते
वृन्दावन, गिरिनार.
पीली सरसों
देखकर
प्रमुदित हुए किसान,
तुलसी का
मानस खुला
ग़ालिब का दीवान,
सारंगी
शहनाइयां
बजने लगे सितार.
कवि /गीतकार
जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |
सर्वप्रथम मेरा यह गीत नवनीत में आदरणीय श्री विश्वनाथ सचदेव जी ने प्रकाशित किया था |फिर मेरे गीत संग्रह में प्रकाशित हुआ |विगत वर्ष फरवरी अंक में इंदौर से प्रकाशित वीणा में यह प्रकाशित है |
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| चित्र -साभार गूगल |
अबकी शाखों पर वसंत तुम
एक गीत -
अबकी शाखों पर
वसंत तुम
फूल नहीं रोटियाँ खिलाना |
युगों -युगों से
प्यासे होठों को
अपना मकरंद पिलाना |
धूसर मिट्टी की
महिमा पर
कालजयी कविताएं लिखना ,
राजभवन
जाने से पहले
होरी के आँगन में दिखना ,
सूखी टहनी
पीले पत्तों पर
मत अपना रौब जमाना |
जंगल ,खेतों
और पठारों को
मोहक हरियाली देना ,
बच्चों को
अनकही कहानी
फूल -तितलियों वाली देना ,
चिंगारी -लू
लपटों वाला
मौसम अपने साथ न लाना |
सुनो दिहाड़ी
मज़दूरिन को
फूलों के गुलदस्ते देना ,
बंद गली
फिर राह न रोके
खुली सड़क चौरस्ते देना ,
साँझ ढले
स्लम की देहरी पर
उम्मीदों के दिए जलाना |
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र -गूगल से साभार |