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रविवार, 1 फ़रवरी 2026

अहा ज़िन्दगी में गीत

 



अहा ज़िन्दगी में वसंत पर गीत




सूरज कल भोर में जगाना 
नींद नहीं 
टूटे तो 
देह गुदगुदाना |
सूरज कल
खिड़की से
भोर में जगाना |

फूलों में 
रंग भरे 
खुशबू हो देह धरे ,
मौसम के 
होठों से 
रोज सगुन गीत झरे ,

फिर आना 
झील -ताल 
बांसुरी बजाना |

हल्दी की 
गाँठ बंधे 
रंग हों जवानी के ,
इन सूखे 
खेतों में 
मेघ घिरें पानी के ,

धरती की 
कोख हरी 
दूब को उगाना |

लुका -छिपी 
खेलेंगे 
जीतेंगे -हारेंगे 
मुंदरी के 
शीशे में 
हम तुम्हें निहारेंगे ,

मन की 
दीवारों पर
अल्पना सजाना |

कवि/गीतकार-जयकृष्ण राय तुषार

चित्र -गूगल से साभार 



शनिवार, 31 जनवरी 2026

एक गीत -वह देश बड़ा हो जाता है

 

चित्र गूगल से साभार

चित्र -गूगल से साभार 
चित्र -गूगल से साभार 



कोई भी देश मात्र अपनी भौगोलिक सीमाओं ,नदियों ,विशाल पर्वतों से बड़ा नहीं होता बड़ा होता है वह अपनी समरसता विविधता से बड़ा होता है सर्वधर्म समभाव से ,बड़ा होता है वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से ,बड़ा होता है अपनी कला और संस्कृति से ,बड़ा होता है अपनी अच्छी परम्पराओं से ,लोकरंगों से ,बड़ा होता है सबको साथ लेकर चलने से |भारत भी ऐसा एक विविध रंगों वाला देश है जो सदियों से अतिथि प्रेमी रहा है |यहाँ विविधता है और यही हमारी सबसे बड़ी पहचान है |जय हिन्द जय भारत |
एक गीत -
वह देश बड़ा हो जाता है

सब धर्म जहाँ 
मिलकर रहते 
वह देश बड़ा हो जाता है |
जिसकी मिटटी 
में कई रंग 
समझो वह भारत माता है |

जिसके होठों पर 
हिंदी संग उर्दू 
बांग्ला गुजराती है ,
जो तमिल ,तेलगू ,
मलयालम ,
कन्नड़ में गीत सुनाती है ,
उत्तर -पूरब 
का लोकरंग 
सबकी आँखों को भाता है |

चकबस्त ,फ़िराक 
जहाँ उर्दू के 
शायर  माने जाते हैं ,
जिसमें नज़ीर 
रसखान कृष्ण की 
लीलाओं को गाते हैं ,
कुछ है इसमें 
जहाँ   मार्क टुली भी 
आकर  के बस जाता है |

यह ताना -बाना 
बना रहे सब 
मिलकर यही दुआ करना ,
इसके सांचे में 
चुन- चुनकर 
जितना सम्भव हो रंग भरना ,
हो मिलन प्रेम का 
जहाँ क्षितिज पर 
इन्दधनुष बन जाता है |


चित्र -गूगल से साभार

शनिवार, 24 जनवरी 2026

एक गीत महाप्राण निराला के लिए

 

महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला 
एक गीत -महाप्राण निराला को समर्पित -
ओ सदानीरा निराला के सुनहरे गीत गाना 
पर्वतों की 
घाटियों से 
जब इलाहाबाद आना |
ओ सदानीरा !
निराला के 
सुनहरे गीत गाना |

आज भी 
'वह तोड़ती पत्थर '
पसीने में नहाये ,
सर्वहारा 
के लिए अब 
कौन ऐसा गीत गाये ,
एक फक्कड़ 
कवि हुआ था 
पीढ़ियों को तुम बताना |

'राम की थी 
शक्ति पूजा '
पर निराला गा रहे हैं ,
उस कथानक 
में निराला 
राम बनकर आ रहे है ,
अर्चना में 
कम न हो जाएँ 
कमल के फूल लाना |

आज भी है 
वहीं दारागंज 
संगम के किनारे ,
वक्त की 
लहरें मिटाकर 
ले गयीं पदचिन्ह सारे ,
ओ गगन 
जब गर्जना तो 
वही 'बादल राग 'गाना |

पूर्णिमा के 
ज्वार सा मन ,
वक्ष में आकाश सारा ,
वह 
इलाहाबाद का 
उसको इलाहाबाद प्यारा ,
मुश्किलों 
में भी न छोड़ा 
काव्य से रिश्ता निभाना |


वक्त  की 
पगडंडियों पर 
वह अकेला चल रहा था ,
आँधियों में 
एक जिद्दी दीप 
बनकर जल रहा था ,
जानते हैं 
सब  बहुत पर 
आज भी  वह कवि अजाना |

गोद बासन्ती 
मिली पर 
पत्थरों के गीत गाया ,
फूल 
साहूकार ,सेठों 
की तरह ही नज़र आया ,
छन्द तोड़ा 
मगर उसको 
छन्द आता था सजाना |

गीतकार-जयकृष्ण राय तुषार
चित्र -गूगल से साभार 

एक गीत -नदी किनारे मौसम

 

चित्र साभार गूगल

एक गीत -नदी किनारे मौसम का 


जंगल काटे गए

धुंआ

शहरों के नाम हुआ.

अंधाधुंध 

तरक्की का 

कैसा अंजाम हुआ.


वन -बस्ती में 

सन्नाटा 

चिड़ियों के गीत नहीं,

नदी किनारे 

मौसम का अब 

कोई मीत नहीं,

चौड़ी सड़के 

फिर भी हर दिन 

रस्ता जाम हुआ.


कथा सुनाती 

शामें 

महुआ चुनती भोर नहीं,

कोहबर 

गाते मौन 

कहीं गीतों का शोर नहीं.

याद नहीं 

कब गली 

मोहल्लों से जै राम हुआ.

कवि 

जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


बुधवार, 21 जनवरी 2026

एक ताज़ा गीत -गीत, पपीहा, बांसुरी

 

चित्र साभार गूगल

एक ताज़ा गीत -गीत, पपीहा, बांसुरी


गीत, पपीहा 

बांसुरी 

वासंती श्रृंगार.

प्रेमगीत 

लिखने लगा 

फूलों में इतवार.


पीली -नीली 

चिट्ठियां 

वन में पढ़े पलाश,

नदी किनारे 

खाट पर 

मौसम खेले ताश,

सुबह 

हवा में उड़ रहे 

मेजों से अख़बार.


तन्हा बैठे 

फूल को 

फिर तितली की याद,

मौन मुखर 

करने लगा 

आँखों से संवाद,

राधे राधे 

बोलते 

वृन्दावन, गिरिनार.


पीली सरसों 

देखकर 

प्रमुदित हुए किसान,

तुलसी का 

मानस खुला 

ग़ालिब का दीवान,

सारंगी 

शहनाइयां 

बजने लगे सितार.


कवि /गीतकार

जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


रविवार, 18 जनवरी 2026

एक पुराना गीत -अबकी शाखों पर वसंत तुम

 सर्वप्रथम मेरा यह गीत नवनीत में आदरणीय श्री विश्वनाथ सचदेव जी ने प्रकाशित किया था |फिर मेरे गीत संग्रह में प्रकाशित हुआ |विगत वर्ष फरवरी अंक में इंदौर से प्रकाशित वीणा में यह प्रकाशित है | 

 

चित्र -साभार गूगल 


अबकी शाखों पर वसंत तुम 

एक गीत -

अबकी शाखों पर 

वसंत तुम 

फूल नहीं रोटियाँ खिलाना |

युगों -युगों से 

प्यासे होठों को 

अपना मकरंद पिलाना |


धूसर मिट्टी की 

महिमा पर 

कालजयी कविताएं लिखना ,

राजभवन 

जाने से पहले

होरी के आँगन में दिखना ,


सूखी टहनी 

पीले पत्तों पर 

मत अपना रौब जमाना |


जंगल ,खेतों 

और पठारों को 

मोहक हरियाली देना ,

बच्चों को 

अनकही कहानी 

फूल -तितलियों वाली देना ,

चिंगारी -लू 

लपटों वाला 

मौसम अपने  साथ न लाना |


सुनो दिहाड़ी 

मज़दूरिन को 

फूलों के गुलदस्ते देना ,

बंद गली 

फिर राह न रोके 

खुली सड़क चौरस्ते देना ,

साँझ ढले 

स्लम की देहरी पर 

उम्मीदों के दिए जलाना |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

चित्र -गूगल से साभार 

कुम्भ गीत -यह प्रयाग है

 

संगम प्रयाग



 मित्रों 2001 महाकुम्भ में इस गीत को मैंने लिखा था. आकाशवाणी कलाकारों ने इसे गाया है विडिओ भाई दिव्यांश द्विवेदी ने बनाया है. आज मौनी अमावस्या है. सभी को हार्दिक शुभ. भारत में और विश्व में सनातन आस्था अपराजेय बनी रही. लोगों का मार्गदर्शन सनातन के संत करते रहें. शुभकामनायें. आप सभी को प्रयाग का पुण्य फल मिले.




बुधवार, 7 जनवरी 2026

सुप्रसिद्ध संस्कृत भजन गायिका सुश्री माधवी मधुकर से मुलाक़ात

 

सुप्रसिद्ध भजन गायिका सुश्री माधवी मधुकर
से मुलाक़ात और ग़ज़ल संग्रह भेंट

आज देश की यशस्वी गायिका जिनकी प्रशंसा माननीय प्रधानमंत्री जी कर चुके हैं. जिनकी वाणी शब्द, उच्चारण सनातन परम्परा सब कुछ अतुलनीय है.  संस्कृत पदों, भजनों को का मधुर गायन देश के कोने कोने में सुनने को मिलता है. सुश्री माधवी मधुकर सहज और शालीन हैं. आज होटल मिलन में मुलाक़ात हुई. गंगा पंडाल में आज कर्यक्रम है. माधवी जी के म्यूजिक प्रमुख गाज़ीपुर जनपद के रहने वाले हैं. माधवी जी आपके सुरों की अनुगूंज देश की सरहदों के परे हो. सादर

सुश्री माधवी मधुकर और उनके म्यूजिक हेड
 श्री गुप्ता जी


रविवार, 28 दिसंबर 2025

माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण जी को पुस्तक भेंट

 आज सहज सरल और अप्रतिम व्यक्तित्व के धनी, क़ानून के ज्ञाता महान न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण जी से मिलने का सौभाग्य मिला. श्री राममंदिर पर ऐतिहासिक फैसला देने वाले न्यायमूर्ति माननीय श्री रंजन गोगोई जी तत्कालीन मुख्य न्यायधीश. माननीय न्यायमूर्ति श्री एस.ए. बोबडे.माननीय श्री डी. वाई. चंद्रचूड़ माननीय न्यायमूर्ति एस.ए.नज़ीर और माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण जी थे  . आप सभी का दिन शुभ हो.

माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण जी
उच्चतम न्यायालय (सेवानिवृत्त)

माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण
उच्चतम न्यायालय

श्रीराम मंदिर पर निर्णय देने वाले महान न्यायधीश

श्री राम मंदिर पर महत्वपूर्ण ऐतिहासिक निर्णय देने वाले
महान न्यायमूर्ति गण