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| सभी चित्र साभार गूगल |
हिन्दी गीत /नवगीत /ग़ज़ल
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| सभी चित्र साभार गूगल |
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| श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी वित्त नियंत्रक उच्च शिक्षा |
आज उच्च शिक्षा निदेशालय में वित्त नियंत्रक आदरणीय श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी से सहृदय मुलाक़ात हुई. आज की मुलाक़ात काफ़ी अरसा बाद हुई है.त्रिपाठी जी वित्त नियंत्रक उच्च शिक्षा. राजेंद्र प्रसाद उर्फ़ रज्जू भैया विश्व विद्यालय में भी कार्यरत हैं. ब्लॉगर भी हैं साहित्यिक अभिरूचि के हैं. दूसरी तसवीर जौनपुर के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व आदरणीय श्री परमानंद झा सर की है. झा साहब भी साहित्यिक अभिरूचि के हैं. आप सभी का दिन शुभ हो.
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| श्री परमानन्द झा अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व जौनपुर |
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| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र -साभार गूगल |
एक गीत -मौसम में खुशबू है इतर और पान की
हाथों में
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| चित्र -साभार गूगल |
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| हरद्वार गंगा चित्र साभार गूगल |
एक पुरानी ग़ज़ल -कहीं से लौट के आऊँ
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| चित्र साभार गूगल |
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| फूलों की घाटी हिमालय |
एक ग़ज़ल देश के नाम -
कहीं से लौट के आऊँ तुझी से प्यार रहे
हवा ,ये फूल ,ये खुशबू ,यही गुबार रहे
कहीं से लौट के आऊँ तुझी से प्यार रहे
मैं जब भी जन्म लूँ गंगा तुम्हारी गोद रहे
यही तिरंगा ,हिमालय ये हरसिंगार रहे
बचूँ तो इसके मुकुट का मैं मोरपंख बनूँ
मरूँ तो नाम शहीदों में ये शुमार रहे
ये मुल्क ख़्वाब से सुंदर है जन्नतों से बड़ा
यहाँ पे संत ,सिद्ध और दशावतार रहे
मैं जब भी देखूँ लिपट जाऊँ पाँव को छू लूँ
ये माँ का कर्ज़ है चुकता न हो उधार रहे
भगत ,आज़ाद औ बिस्मिल ,सुभाष भी थे यहीं
जो इन्क़लाब लिखे सब इन्हीं के यार रहे
आज़ादी पेड़ हरा है ये मौसमों से कहो
न सूख पाएँ परिंदो को एतबार रहे
तमाम रंग नज़ारे ये बाँकपन ये शाम
सुबह के फूल पे कुछ धूप कुछ 'तुषार 'रहे
कवि /शायर -जयकृष्ण राय तुषार
चित्र -साभार गूगल
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| चित्र साभार गूगल |
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| हिंदुस्तानी एकेडमी की कोषाधिकारी श्रीमती पायल सिंह जी मुझे सम्मानित करते हुए |
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| मंच पर काव्य पाठ करते हुए मेरी तसवीर |
विगत 3 अगस्त को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी के जन्मदिवस पर हिंदुस्तानी एकेडमी से कई वर्ष बाद काव्य पाठ का आमंत्रण मिला. हिंदुस्तानी एकेडमी की कोषाधिकारी श्रीमती पायल सिंह जी के प्रति हृदय से कृतज्ञ हूँ. 3अगस्त को डॉ जगदीश गुप्त जी का जन्मदिवस मनाया जाता है उनको भी कार्यक्रम समर्पित था. कुछ दिनों से फेसबुक से विरक्त था. शुभ संध्या.
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| यादगार पल |
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| श्रीमती पायल सिंह कवियों का स्वागत करते हुए |
| राष्ट्कवि मैथिलिशरण गुप्त का जन्मदिन कवि दिवस के रूप में हिंदुस्तानी एकेडमी मनाती है. डॉ जगदीश गुप्त जी का भी जन्मदिन 3 अगस्त है |
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| अविस्मरणीय पल |
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| पुष्पांजलि अर्पण |
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| चित्र साभार गूगल |
नदी के इस पार
मैं हूँ
उस तरफ सब फूल हैं.
घना कोहरा
नाव माझी
बात में मशगूल हैं.
गन्ध पुष्पों के
बिना अब
देवता पर क्या चढ़े?
शोक में
डूबा हुआ मन
मंत्र वैदिक क्या पढ़े?
तैर भी
सकता नहीं
गहरे भंवर के कूल हैं.
रेत के टीले
इधर हैं
उधर चंदन वन घना है,
आरती के
स्वर उधर हैं
इधर मौसम अनमना है,
राम पथ में
पाँव नंगे
कांच बिखरे शूल हैं.
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| चित्र साभार गूगल श्रीराम जी |
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| माननीय न्यायमूर्ति श्री पंकज मित्तल जी उच्चतम न्यायालय (से. नि.) |
आज प्रयागराज आगमन पर माननीय न्यायमूर्ति उच्चतम न्यायालय (अभी हाल में सेवानिवृत) को महारानी अहिल्याबाई होलकर और शिवाजी सावंत की लिखी नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर पुस्तक भेंट किए.
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| माननीय न्यायमूर्ति श्री पंकज मित्तल जी |
राष्ट्र धर्म और उसके समस्त सम्पादक मंडल के प्रति हृदय से कृतज्ञ हूँ सबसे अधिक राष्ट्र धर्म के निदेशक परम श्रद्धेय आदरणीय श्री मनोजकांत जी के प्रति हृदय से आभार जिनके आशीष से तीन गीत प्रकाशित हैं. यह जुलाई अंक 2026 है. अभिभूत हूँ
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| राष्ट्र धर्म |
पुरी यात्रा दिनांक 7 जून को पुरुषोत्तम मास में पुरुषोत्तम ट्रेन से प्रारम्भ हुई 8 जून को तेज बारिश में भींगकर भगवान जगन्नाथ जी की कृपा से दर्शन हुआ. बेड़ी हनुमान जी,गुंडीचा देवी,जगन्नाथ जी की ससुराल,बलिया पांडा बीच, कोणार्क, लिंगराज मंदिर, चंद्रभागा बीच पुरी बीच का आनंद लिए. 8 जून को वैवाहिक वर्षगांठ थी. सबसे अनूठी मुलाक़ात सहृदय व्यक्तित्व के अधिकारी और लेखक आदरणीय परमेश्वर फुंकवाल सर और उनकी श्रीमती जी से हुई. काफ़ी सम्मान मिला सर रेलवे पूर्वी तट के महाप्रबंधक पद पर भुवनेश्वर में तैनात हैं. 11 जून को वापसी टिकट वेटिंग लिस्ट था लेकिन आदरणीय परमेश्वर फुंकवाल सर के सहयोग से यात्रा निर्विघ्न सम्पन्न हुई. इस यात्रा में सम्मानीय मेंबर (न्यायिक) एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल(C. A. T.) आदरणीय श्री रजनीश कुमार राय जी का सहयोग भी अप्रतिम रहा.इस धार्मिक यात्रा में मेरी पत्नी श्रीमती मंजुला राय और बेटी सौम्या राय साथ थी.जय जगन्नाथ जी.
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| जगन्नाथ जी पुरी |
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| चंद्रभागा बीच |
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| कोणार्क मंदिर |
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| लिंगराज मंदिर |
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| भुवनेश्वर महाप्रबंधक पूर्वी तट रेलवे आदरणीय श्री परमेश्वर फुंकवाल जी और मैं साथ में मिसेज़ फुंकवाल और मेरी पत्नी श्रीमती मंजुला राय पुस्तक भेंट |
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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -अपने मन के वृंदावन में
तुम भी मुझको
याद न आना
मैं भी याद न आऊँगा.
अपने मन के
वृन्दावन में
वंशी लेकर गाऊँगा.
मैंने लिखी
विरह की बातें
तुम कहते हो प्रेम गीत है,
राधा कृष्ण के
प्रेम भाव को लिखना
सबसे कठिन मीत है,
मीराबाई, सूरदास की
वाणी
कैसे लाऊँगा.
हर कदम्ब
हर यमुना तट को
गोपी ग्वाल नहीं मिलते,
जल तो
सारी नदियों में है
सबमें कमल नहीं खिलते,
मन्दिर हो
या हो पगडंडी
सबमें दीप जलाऊँगा.
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| चित्र साभार गूगल |
कवि गीत कार
जयकृष्ण राय तुषार