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शनिवार, 11 अप्रैल 2026

एक गीत -जिस पावन मिट्टी में खिलते

 

चित्र साभार गूगल 

एक गीत -जिस मिट्टी में खिलते हैं 


जिस पावन मिट्टी में खिलते 
ये फूल उसे महकाते हैं.
हम भारत माँ के बच्चे हैं 
भारत के गीत सुनाते हैं.

ब्रह्म कमल जिसमें खिलते हैं 
गंगा जिसमें बहती है,
भक्ति भाव से सरयू जिसमें 
रामकथा को कहती है,
राधा जी के संग स्याम जहाँ 
निधि वन में रास रचाते हैं.

इस मिट्टी का रंग सलोना 
मौसम यहाँ बदलते हैं,
लोकरंग के साथ विविधता 
साथ लिए हम चलते हैं,
हम आज़ादी का महापर्व 
उत्सव की तरह मनाते हैं.

विंध्य, नीलगिरि और हिमांचल 
खुलकर इसमें हँसते हैं,
इस नंदन कानन में जाने 
कितने पंछी बसते हैं,
मोर नाचते, हिरन खेलते 
झरने गीत सुनाते हैं.

भारत माँ की छवि को आओ 
फिर से सोने में मढ़ते हैं,
जो भी अनगढ़ पत्थर बाकी 
आओ उनको फिर गढ़ते हैं,
हम अहं तोड़ते असुरों का 
लंका भी हमीं जलाते हैं 
लंका हमीं जलाते हैं 

कवि /गीतकार 
जयकृष्ण राय तुषार 
भारत माता चित्र साभार गूगल 


मंगलवार, 31 मार्च 2026

एक गीत -धूप के कटोरे में चाँदनी सजाना

  

चित्र साभार गूगल 
युद्ध किसी के लिए अच्छा नहीं होता.आतंक और युद्ध दोनों मानवता के विरुद्ध अपराध हैं.दुनिया को युद्ध में धकेलने वाले महानायक नहीं बन सकते. ईरान और अमरीका दोनों को विश्व शांति की प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए. आतंक और जेहाद फैलाने वाले देशों पर कड़ा प्रतिबंध लगना चाहिए.प्रेम और शांति ही मानवता की रक्षा कर सकते हैं. सृजन और संहार ईश्वर का कार्य है महाकाल के कार्य में मनुष्य को दखल नहीं देना चाहिए. विश्व में शांति ही सबसे सुन्दर विकल्प है.

दुनिया को युद्ध से बचाना 


बेला के 
फूलों से 
केश को सजाना.
ओ अशांति 
दुनिया को 
युद्ध से बचाना.

चिड़ियों के 
पँख बचे 
नदियों में धार रहे,
बारूदी गंध 
मिटे 
दुनिया में प्यार रहे,
ओ वंशीधर 
अपनी 
बॉसुरी बजाना.

राग बचे 
रंग बचे 
पानदान पान रहे,
पूरब से 
पश्चिम तक 
मोहक मुस्कान रहे,
झुकी हुई
नज़रों में 
आग मत सजाना.

इंद्रधनुष 
क्षितिजों पर 
सावन में आएंगे,
झील -ताल 
भींगेंगे 
प्रेम गीत गाएंगे,
मिलने को 
ढूंगेंगे 
लोग फिर बहाना.

दम्भ लिए
चेहरों  पर 
कोमल सा भाव खिले,
हिंसा की 
पगडण्डी को 
फिर से बुद्ध मिले,
धूप के 
कटोरे में 
चाँदनी सजाना.

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

चित्र साभार गूगल 



गुरुवार, 19 मार्च 2026

सुश्री हर्षिका सिंह मुख्य विकास अधिकारी प्रयागराज को पुस्तक भेंट

 आज प्रयागराज स्थित विकास भवन जाकर होनहार I. A. S. सहज सरल मृदुभाषी अधिकारी सुश्री हर्षिका सिंह से मिलकर अपना ग़ज़ल संग्रह भेंट किए. हर्षिका जी इंजिनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं. आप सभी का दिन शुभ हो.

सुश्री हर्षिका सिंह I. A. S
मुख्य विकास अधिकारी प्रयागराज 
को पुस्तक भेंट 

मुख्य विकास अधिकारी प्रयागराज 
सुश्री हर्षिका सिंह I. A. S


रविवार, 15 मार्च 2026

पद्मश्री श्री अनूप जलोटा जी मेरा ग़ज़ल संग्रह पढ़ते हुए

  अद्भुत क्षण महान भजन गायक आदरणीय श्री अनूप जलोटा जी मेरी किताब पढ़ते हुए. और प्रसंशा करते हुए आदरणीया श्रीमती दीप्ती चतुर्वेदी जी के प्रति हृदय से कृतज्ञ हूँ जिनकी कृपा मुझ पर रहती है. आप सभी का दिन शुभ हो 

पद्मश्री अनूप जलोटा जी मेरा ग़ज़ल संग्रह 
पढ़ते हुए 


यह तसवीर 26-03-3026 को होटल यात्रिक 
प्रयागराज में ली गयी है 




रविवार, 1 मार्च 2026

एक पुराना गीत -टोकरी भर कर गुलाबी फूल

  

कवि
 जयकृष्ण राय तुषार 

चित्र -साभार गूगल 


एक गीत -

टोकरी  भरकर  गुलाबी फूल लाऊँगा 

टोकरी 
भरकर 
गुलाबी फूल लाऊँगा |
इस 
हवा को मैं 
सुगन्धों से सजाऊँगा |

हँसो चम्पा !
डरो मत 
यह समय बीतेगा ,
आदमी 
इस वायरस से 
जंग जीतेगा ,
मैं -तुम्हारे
वायलिन
पर गीत गाऊँगा |

हरे पत्तों 
से हवा 
माँगो नदी से जल ,
लौट आयेंगे 
गगन में 
वृष्टि के बादल ,
इसी 
माटी पर 
हरेपन को सजाऊँगा |

फिर हँसेंगे  
बाजरे 
और धान खेतों में ,
दौड़ते 
होंगे हिरन 
दिनमान रेतों में  ,
चाँदनी 
में फिर 
तुम्हें किस्से सुनाऊँगा |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 
चित्र -साभार गूगल 

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

श्री विनोद कुमार बरनवाल प्रधान न्यायधीश परिवार न्यायालय जनपद बलरामपुर

 आज बहुत आत्मीय मित्र श्री विनोद कुमार बरनवाल जी प्रधान न्यायधीश फेमिली कोर्ट जनपद बलरामपुर एक वैवाहिक समारोह में प्रयागराज आए तो मुलाक़ात हुईं फिर सुबह मनकामेश्वर जी का दर्शन हुआ. बहुत ही आनंददायक दिन रहा.

श्री विनोद कुमार बरनवाल प्रधान न्यायधीश 
जनपद बलरामपुर 

श्री विनोद कुमार बरनवाल 
प्रधान न्यायधीश फेमिली कोर्ट 
बलरामपुर 

यमुना जी का दृश्य 

यमुना जी का दृश्य 


बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

श्री कृष्ण कुमार यादव जी को पुस्तक भेंट

 आज बेहतरीन संयोग था आदरणीय कृष्ण कुमार यादव जी प्रतिष्ठित लेखक एवं ब्लॉगर जो भारतीय डाक सेवा में पोस्ट मास्टर जनरल हैं उनसे मुख्य डाकघर के गेस्ट हाउस में मुलाक़ात हुई और मैंने लोकभारती से प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह भेंट किया. आदरणीय श्री के. के. यादव जी सहज व्यक्तित्व के धनी हैं. उनसे मिलना बहुत ही सुखद लगता है. फोटो भाई श्री अभय यादव जी ने लिया उनके प्रति हृदय से आभार.आप सभी का दिन शुभ हो.

श्री कृष्ण कुमार यादव जी 
पोस्ट मास्टर जनरल अहमदाबाद 
एवं लेखक /ब्लॉगर को 
पुस्तक भेंट 


श्री के. के. यादव जी 
पोस्टमास्टर जनरल एवं प्रतिष्ठित 
लेखक 


शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

पुस्तक भेंट -श्री रामनरेश त्रिपाठी पिंडीवासा जी को ग़ज़ल संग्रह भेंट

 

आदरणीय श्री रामनरेश त्रिपाठी पिंडीवासा जी को पुस्तकभेंट 


आज दिनांक 21-02-2026 को आदरणीय श्री राम नरेश तिवारी पिंडीवासा जी जिला प्रबंधक /उपमहाप्रबंधक से. नि. खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय भारत सरकार. वर्तमान में सदस्य हिन्दी सलाहकार समिति वाणिज्य मंत्रालय एवं पंचायती राज्य मंत्रालय भारत सरकार व नगर प्रधान केंद्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद प्रयागराज के आवास पर अपनी पुस्तक /ग़ज़ल संग्रह *सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है *की एक प्रति सम्मानपूर्वक भेंट किए. इस अवसर पर पिंडीवासा जी से आशीर्वाद प्राप्त कर प्रसन्नता मिली उनके द्वारा मेरे जीवन में रचना के क्षेत्र में उत्तरोत्तर वृद्धि का आशीष भी मिला. आप सभी का दिन शुभ हो.

पिंडीवासा जी को पुस्तक भेंट 


रविवार, 1 फ़रवरी 2026

अहा ज़िन्दगी में गीत

 



अहा ज़िन्दगी में वसंत पर गीत




सूरज कल भोर में जगाना 
नींद नहीं 
टूटे तो 
देह गुदगुदाना |
सूरज कल
खिड़की से
भोर में जगाना |

फूलों में 
रंग भरे 
खुशबू हो देह धरे ,
मौसम के 
होठों से 
रोज सगुन गीत झरे ,

फिर आना 
झील -ताल 
बांसुरी बजाना |

हल्दी की 
गाँठ बंधे 
रंग हों जवानी के ,
इन सूखे 
खेतों में 
मेघ घिरें पानी के ,

धरती की 
कोख हरी 
दूब को उगाना |

लुका -छिपी 
खेलेंगे 
जीतेंगे -हारेंगे 
मुंदरी के 
शीशे में 
हम तुम्हें निहारेंगे ,

मन की 
दीवारों पर
अल्पना सजाना |

कवि/गीतकार-जयकृष्ण राय तुषार

चित्र -गूगल से साभार 



शनिवार, 31 जनवरी 2026

एक गीत -वह देश बड़ा हो जाता है

 

चित्र गूगल से साभार

चित्र -गूगल से साभार 
चित्र -गूगल से साभार 



कोई भी देश मात्र अपनी भौगोलिक सीमाओं ,नदियों ,विशाल पर्वतों से बड़ा नहीं होता बड़ा होता है वह अपनी समरसता विविधता से बड़ा होता है सर्वधर्म समभाव से ,बड़ा होता है वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से ,बड़ा होता है अपनी कला और संस्कृति से ,बड़ा होता है अपनी अच्छी परम्पराओं से ,लोकरंगों से ,बड़ा होता है सबको साथ लेकर चलने से |भारत भी ऐसा एक विविध रंगों वाला देश है जो सदियों से अतिथि प्रेमी रहा है |यहाँ विविधता है और यही हमारी सबसे बड़ी पहचान है |जय हिन्द जय भारत |
एक गीत -
वह देश बड़ा हो जाता है

सब धर्म जहाँ 
मिलकर रहते 
वह देश बड़ा हो जाता है |
जिसकी मिटटी 
में कई रंग 
समझो वह भारत माता है |

जिसके होठों पर 
हिंदी संग उर्दू 
बांग्ला गुजराती है ,
जो तमिल ,तेलगू ,
मलयालम ,
कन्नड़ में गीत सुनाती है ,
उत्तर -पूरब 
का लोकरंग 
सबकी आँखों को भाता है |

चकबस्त ,फ़िराक 
जहाँ उर्दू के 
शायर  माने जाते हैं ,
जिसमें नज़ीर 
रसखान कृष्ण की 
लीलाओं को गाते हैं ,
कुछ है इसमें 
जहाँ   मार्क टुली भी 
आकर  के बस जाता है |

यह ताना -बाना 
बना रहे सब 
मिलकर यही दुआ करना ,
इसके सांचे में 
चुन- चुनकर 
जितना सम्भव हो रंग भरना ,
हो मिलन प्रेम का 
जहाँ क्षितिज पर 
इन्दधनुष बन जाता है |


चित्र -गूगल से साभार