लेबल

सोमवार, 1 जून 2026

एक गीत -अपने मन के वृंदावन में

 

चित्र साभार गूगल 

एक गीत -अपने मन के वृंदावन में 

तुम भी मुझको 

याद न आना 

मैं भी याद न आऊँगा.

अपने मन के 

वृन्दावन में 

वंशी लेकर गाऊँगा.


मैंने लिखी 

विरह की बातें 

तुम कहते हो प्रेम गीत है,

राधा कृष्ण के 

प्रेम भाव को लिखना 

सबसे कठिन मीत है,

मीराबाई, सूरदास की 

वाणी 

कैसे लाऊँगा.


हर कदम्ब 

हर यमुना तट को 

गोपी ग्वाल नहीं मिलते,

जल तो 

सारी नदियों में है 

सबमें कमल नहीं खिलते,

मन्दिर हो 

या हो पगडंडी 

सबमें दीप जलाऊँगा.

चित्र साभार गूगल 


कवि गीत कार 

जयकृष्ण राय तुषार

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें