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रविवार, 1 फ़रवरी 2026

अहा ज़िन्दगी में गीत

 



अहा ज़िन्दगी में वसंत पर गीत




सूरज कल भोर में जगाना 
नींद नहीं 
टूटे तो 
देह गुदगुदाना |
सूरज 
कल भोर में 
जगाना |

फूलों में 
रंग भरे 
खुशबू हो देह धरे ,
मौसम के 
होठों से 
रोज सगुन गीत झरे ,

फिर आना 
झील -ताल 
बांसुरी बजाना |

हल्दी की 
गाँठ बंधे 
रंग हों जवानी के ,
इन सूखे 
खेतों में 
मेघ घिरें पानी के ,

धरती की 
कोख हरी 
दूब को उगाना |

लुका -छिपी 
खेलेंगे 
जीतेंगे -हारेंगे 
मुंदरी के 
शीशे में 
हम तुम्हें निहारेंगे ,

मन की 
दीवारों पर
अल्पना सजाना |

चित्र -गूगल से साभार