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| चित्र गूगल से साभार |
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| चित्र -गूगल से साभार |
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| चित्र -गूगल से साभार |
वह देश बड़ा हो जाता है
आकर के बस जाता है |
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| चित्र गूगल से साभार |
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| चित्र -गूगल से साभार |
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| चित्र -गूगल से साभार |
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| महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला |
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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -नदी किनारे मौसम का
जंगल काटे गए
धुंआ
शहरों के नाम हुआ.
अंधाधुंध
तरक्की का
कैसा अंजाम हुआ.
वन -बस्ती में
सन्नाटा
चिड़ियों के गीत नहीं,
नदी किनारे
मौसम का अब
कोई मीत नहीं,
चौड़ी सड़के
फिर भी हर दिन
रस्ता जाम हुआ.
कथा सुनाती
शामें
महुआ चुनती भोर नहीं,
कोहबर
गाते मौन
कहीं गीतों का शोर नहीं.
याद नहीं
कब गली
मोहल्लों से जै राम हुआ.
कवि
जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र साभार गूगल |
एक ताज़ा गीत -गीत, पपीहा, बांसुरी
गीत, पपीहा
बांसुरी
वासंती श्रृंगार.
प्रेमगीत
लिखने लगा
फूलों में इतवार.
पीली -नीली
चिट्ठियां
वन में पढ़े पलाश,
नदी किनारे
खाट पर
मौसम खेले ताश,
सुबह
हवा में उड़ रहे
मेजों से अख़बार.
तन्हा बैठे
फूल को
फिर तितली की याद,
मौन मुखर
करने लगा
आँखों से संवाद,
राधे राधे
बोलते
वृन्दावन, गिरिनार.
पीली सरसों
देखकर
प्रमुदित हुए किसान,
तुलसी का
मानस खुला
ग़ालिब का दीवान,
सारंगी
शहनाइयां
बजने लगे सितार.
कवि /गीतकार
जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |
सर्वप्रथम मेरा यह गीत नवनीत में आदरणीय श्री विश्वनाथ सचदेव जी ने प्रकाशित किया था |फिर मेरे गीत संग्रह में प्रकाशित हुआ |विगत वर्ष फरवरी अंक में इंदौर से प्रकाशित वीणा में यह प्रकाशित है |
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| चित्र -साभार गूगल |
अबकी शाखों पर वसंत तुम
एक गीत -
अबकी शाखों पर
वसंत तुम
फूल नहीं रोटियाँ खिलाना |
युगों -युगों से
प्यासे होठों को
अपना मकरंद पिलाना |
धूसर मिट्टी की
महिमा पर
कालजयी कविताएं लिखना ,
राजभवन
जाने से पहले
होरी के आँगन में दिखना ,
सूखी टहनी
पीले पत्तों पर
मत अपना रौब जमाना |
जंगल ,खेतों
और पठारों को
मोहक हरियाली देना ,
बच्चों को
अनकही कहानी
फूल -तितलियों वाली देना ,
चिंगारी -लू
लपटों वाला
मौसम अपने साथ न लाना |
सुनो दिहाड़ी
मज़दूरिन को
फूलों के गुलदस्ते देना ,
बंद गली
फिर राह न रोके
खुली सड़क चौरस्ते देना ,
साँझ ढले
स्लम की देहरी पर
उम्मीदों के दिए जलाना |
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र -गूगल से साभार |
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| संगम प्रयाग |
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| सुप्रसिद्ध भजन गायिका सुश्री माधवी मधुकर से मुलाक़ात और ग़ज़ल संग्रह भेंट |
आज देश की यशस्वी गायिका जिनकी प्रशंसा माननीय प्रधानमंत्री जी कर चुके हैं. जिनकी वाणी शब्द, उच्चारण सनातन परम्परा सब कुछ अतुलनीय है. संस्कृत पदों, भजनों को का मधुर गायन देश के कोने कोने में सुनने को मिलता है. सुश्री माधवी मधुकर सहज और शालीन हैं. आज होटल मिलन में मुलाक़ात हुई. गंगा पंडाल में आज कर्यक्रम है. माधवी जी के म्यूजिक प्रमुख गाज़ीपुर जनपद के रहने वाले हैं. माधवी जी आपके सुरों की अनुगूंज देश की सरहदों के परे हो. सादर
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| सुश्री माधवी मधुकर और उनके म्यूजिक हेड श्री गुप्ता जी |