सुनहरी कलम से

हिन्दी गीत /नवगीत /ग़ज़ल

बुधवार, 17 मार्च 2021

एक ग़ज़ल-इस बार लिखा उसने न मिलने का बहाना

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  चित्र साभार गूगल एक ग़ज़ल मौसम भी वही माली भी बेकार नहीं है पर फूल में खुशबू कहीं इस बार नहीं है इस बार लिखा उसने न मिलने का बहाना इस बार भी...
शनिवार, 13 मार्च 2021

एक गीत-बासमती के धान हरे हैं

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  चित्र साभार गूगल एक गीत-बासमती के धान हरे हैं नहरों,नदियों तालों वाले बासमती के धान हरे हैं । जो मेघों की छाया में थे उनके पत्ते फूल झरे ह...
शुक्रवार, 12 मार्च 2021

एक गीत-इस पठार पर फूलों वाला मौसम लाऊँगा

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  चित्र साभार गूगल   एक गीत- इस पठार पर फूलों वाला मौसम लाऊँगा । मैं अगीत के साथ नहीं हूँ गीत सुनाऊँगा । तुलसी की चौपाई मीरा के पद पढ़ता हूँ,...
गुरुवार, 11 मार्च 2021

एक गीत-सारंगी जोगी मत छोड़ना

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  एक गीत-सारंगी जोगी मत छोड़ना सारंगी जोगी मत छोड़ना । अच्छे पथ पर सबको मोड़ना । जीवन के तार जहाँ ढीले हों दुःख से जब नयन कभी गीले हों तार सभी ...
बुधवार, 10 मार्च 2021

एक गीत-एक रंग होली का

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  चित्र साभार गूगल एक होली गीत एक रंग होली का फागुन के आने का । एक रंग साँवरिया गोकुल,बरसाने का । टेसू के फूलों से  ऋतु का श्रृंगार हुआ, खुश...
शनिवार, 6 मार्च 2021

एक ग़ज़ल - मेरी क़िस्मत में नहीं इस झील का शतदल रहा

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    चित्र -साभार गूगल  ए क ग़ज़ल - मेरी क़िस्मत में नहीं इस झील का शतदल रहा मेरी क़िस्मत में नहीं इस झील का शतदल रहा मैं भी हातिम था मगर हर रास्...
मंगलवार, 2 मार्च 2021

एक ग़ज़ल -मैं तो मिट्टी का दिया हूँ कहीं जल सकता हूँ

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  चित्र -साभार गूगल  एक ग़ज़ल- उड़ भी सकता हूँ मैं ,पानी पे भी चल सकता हूँ सिद्ध हूँ ख़्वाब हक़ीकत में बदल सकता हूँ कुछ भी मेरा हैं कहाँ, घर नही...
सोमवार, 1 मार्च 2021

एक गीत -क्रांतिकारियों के बलिदानों को हम कैसे भूल गए

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  चित्र -साभार गूगल  एक गीत -क्रांतिकारियों के बलिदानों को हम कैसे भूल गए क्रांतिकारियों के बलिदानों को हम कैसे भूल गए । उनकी गाथा फिर से ल...
रविवार, 28 फ़रवरी 2021

एक ग़ज़ल -कोई आज़ाद बतलाओ कि जो आज़ाद जैसा है

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   चित्र -साभार गूगल  एक ग़ज़ल - कोई आज़ाद बतलाओ कि जो आज़ाद जैसा है  तुम्हारा जन्म भारत भूमि पर अपवाद जैसा है  कोई आज़ाद बतलाओ कि जो आज़ाद जैसा ह...

एक ग़ज़ल -रंग पिचकारी लिए मौसम खड़ा

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  चित्र -साभार गूगल  एक ग़ज़ल - रंग- पिचकारी लिए मौसम खड़ा   ख़त 'बिहारी' लिख रहा होकर विकल  ऐ मेरे 'जयसिंह 'मोहब्बत से निकल  फि...
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जयकृष्ण राय तुषार
कवि नाम जयकृष्ण राय तुषार अधिवक्ता उच्च न्यायालय | जन्म स्थान -पसिका आज़मगढ़ ,उत्तर प्रदेश |सम्प्रति निवास -प्रयागराज | ग़ज़ल संग्रह -सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है *लोकभारती से प्रकाशित.देश की सुप्रसिद्ध पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में कविताओं का प्रकाशन | प्रथम गीत संग्रह -सदी को सुन रहा हूँ मैं ,दूसरा गीत संग्रह '"कुछ फूलों के कुछ मौसम के" उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से पुरस्कृत बलवीर सिंह रंग सर्जना पुरस्कार 2017. मेड़ों पर वसंत तीसरा नवगीत संग्रह प्रकाशन वर्ष 2021.
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