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रविवार, 28 दिसंबर 2025

माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण जी को पुस्तक भेंट

 आज सहज सरल और अप्रतिम व्यक्तित्व के धनी, क़ानून के ज्ञाता महान न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण जी से मिलने का सौभाग्य मिला. श्री राममंदिर पर ऐतिहासिक फैसला देने वाले न्यायमूर्ति माननीय श्री रंजन गोगोई जी तत्कालीन मुख्य न्यायधीश. माननीय न्यायमूर्ति श्री एस.ए. बोबडे.माननीय श्री डी. वाई. चंद्रचूड़ माननीय न्यायमूर्ति एस.ए.नज़ीर और माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण जी थे  . आप सभी का दिन शुभ हो.

माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण जी
उच्चतम न्यायालय (सेवानिवृत्त)

माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण
उच्चतम न्यायालय

श्रीराम मंदिर पर निर्णय देने वाले महान न्यायधीश

श्री राम मंदिर पर महत्वपूर्ण ऐतिहासिक निर्णय देने वाले
महान न्यायमूर्ति गण


गुरुवार, 25 दिसंबर 2025

कवयित्री सोनरूपा विशाल से प्रयागराज में एक मुलाक़ात

 

कवयित्री सोनरूपा विशाल को पुस्तक भेंट


पुस्तक भेंट -अपर जिलाधिकारी नज़ूल

श्री पी. के. द्विवेदी
मुख्य कोषधिकारी प्रयागराज को
पुस्तक भेंट

 

अपर जिलाधिकारी नज़ूल प्रयागराज
श्री संजय कुमार पाण्डेय

राजकीय लायब्रेरी के मुखिया
श्री गोपाल जी शुक्ला जी


सोमवार, 15 दिसंबर 2025

एक पुरानी ग़ज़ल -वो अक्सर फूल -परियों की तरह

 

 

चित्र साभार गूगल 


बेटियों /स्त्रियों पर लगातार लैंगिक अपराध से मन दुःखी है. कभी स्त्रियों के दुख दर्द पर मेरी एक ग़ज़ल बी. बी. सी. लंदन की नेट पत्रिका ने प्रकाशित किया था. साहित्य अकादमी के द्वारा प्रकाशित समकालीन हिंदी ग़ज़ल में भी इसे स्थान मिला था. सम्पादक हैँ आदरणीय माधव कौशिक जी.

बी. बी. सी. द्वारा प्रकाशित 



एक पुरानी ग़ज़ल -वो अक्सर फूल -परियों की तरह

 

वो अक्सर फूल परियों की तरह सजकर निकलती है

मगर आँखों में इक दरिया का जल भरकर निकलती है।


कँटीली झाड़ियाँ उग आती हैं लोगों के चेहरों पर

ख़ुदा जाने वो कैसे भीड़  से बचकर निकलती है.


जमाने भर से इज्जत की उसे उम्मीद क्या होगी

खुद अपने घर से वो लड़की बहुत डरकर निकलती है.


बदलकर शक्ल हर सूरत उसे रावण ही मिलता है 

लकीरों से अगर सीता कोई बाहर निकलती है .


सफर में तुम उसे ख़ामोश गुड़िया मत समझ लेना

ज़माने को झुकी नज़रों  से वो पढ़ कर निकलती है.


खुद जिसकी कोख में ईश्वर भी पलकर जन्म लेता है

वही लड़की  खुद अपनी कोख से मरकर निकलती है.


जो बचपन में घरों की जद हिरण सी लांघ आती थी

वो घर से पूछकर हर रोज अब दफ़्तर  निकलती है।


छुपा लेती है सब आंचल में रंजोग़म  के अफ़साने

कोई भी रंग हो मौसम का वो हंसकर निकलती है।


कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

सभी चित्र साभार गूगल

चित्र साभार गूगल 

गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

एक समारोह में माननीय न्यायमूर्ति आदरणीय श्री पंकज मित्तल जी को पुस्तक भेंट

 दिनांक 6 दिसंबर कैंट क्षेत्र D. S. O ग्राउंड में उच्चतम न्यायालय के यशस्वी न्यायमूर्ति आदरणीय श्री पंकज मित्तल जी की पुत्री का दिल्ली में विवाह सम्पन्न होने के बाद स्थानीय (प्रयागराज )रिसेप्शन था. इस यादगार समारोह में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायधीश के साथ अन्य न्यायमूर्ति गण की उपस्थिति के बीच भाई हितेश कुमार सिंह जी से मिलना हुआ. अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा होने के बाद भी हिन्दी और हिन्दी साहित्य के प्रति अतुलनीय प्रेम और न्याय के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचकर भी साधारण जन के प्रति आदरभाव माननीय मित्तल साहब की अद्भुत विशेषता है. कविता लिखने का शौक वह भी  हिन्दी में माननीय की अतिरिक्त विशेषता है.कवियों/लेखकों के प्रति सदैव आदरभाव रखते हैं.इस यादगार और पावन समारोह में मैंने अपना ग़ज़ल संग्रह और श्रीमद भागवत गीता भी माननीय को भेंट किया.प्रयागपथ के मोहन राकेश विशेषांक में माननीय की कुछ कविताएं पढ़ने को मिलीं.


माननीय न्यायमूर्ति श्री पंकज मित्तल जी और प्रयागपथ
के यशस्वी सम्पादक भाई श्री हितेश कुमार सिंह जी
मैंने अपना ताज़ा ग़ज़ल संग्रह भेंट किया

माननीय न्यायमूर्ति श्री पंकज मित्तल जी उच्चतम न्यायालय

माननीय न्यायमूर्ति श्री पंकज मित्तल जी
उच्चतम न्यायालय साथ में प्रयागपथ के
सम्पादक श्री हितेश कुमार सिंह और मैं


सोमवार, 8 दिसंबर 2025

प्रोफ़ेसर योगेंद्र प्रताप सिंह को पुस्तक भेंट

 आज अकस्मात लोकभारती में प्रोफ़ेसर योगेंद्र प्रताप सिंह जी हिन्दी विभाग इलाहाबाद विश्व विद्यालय का आना हुआ. मैंने लोकभारती से प्रकाशित अपना ग़ज़ल संग्रह भेंट किया.आदरणीय श्री रमेश ग्रोवर जी सबसे दाएं बैठे हुए.

प्रोफ़ेसर योगेंद्र प्रताप सिंह हिन्दी विभाग
इलाहाबाद केंद्रीय विश्व विद्यालय और
आदरणीय श्री रमेश ग्रोवर जी

रविवार, 7 दिसंबर 2025

माननीय न्यायमूर्ति एवं पूर्व लोकायुक्त श्री शम्भूनाथ श्रीवास्तव जी

 
आज पूर्व न्यायमूर्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय एवं पूर्व लोकायुक्त उत्तर प्रदेश माननीय श्री शम्भूनाथ श्रीवास्तव जी के आवास पर अपना ग़ज़ल संग्रह भेंट किए.

माननीय न्यायमूर्ति श्री शंभूनाथ श्रीवास्तव जी
को पुस्तक भेंट करते हुए

माननीय न्यायमूर्ति श्री सुधीर नारायण जी

 

माननीय न्यायमूर्ति श्री सुधीर नारायण जी को
अपना ग़ज़ल संग्रह भेंट करते हुए

बुधवार, 3 दिसंबर 2025

एक गीत -फिर गुलाबी कोट निकला है

 

 

चित्र साभार गूगल 


एक गीत -सर्द मौसम 


बर्फ़ में गुलमर्ग 

औली 

और शिमला है.

सर्द मौसम में 

गुलाबी 

कोट निकला है.


छतें 

स्वेटर बुन रही हैं 

भाभियों वाली,

बतकही, चुगली 

कड़कती 

चाय की प्याली,

लाँन में 

हर फूल 

खुशबू और गमला है.


हवा ठंडी 

काँपती सी 

लहर नदियों की,

याद आई 

फिर कहानी 

कई सदियों की,

चाँद 

पूनम का भी 

अबकी बार धुंधला है.


पेड़ से 

उड़कर जमीं 

पर लौट आए हैं,

ओंस में 

भींगे परिंदे 

कुनमुनाये हैं,

मौसमी 

दिनमान 

का भी रंग बदला है.

कवि -जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल