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सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

एक आस्था का गीत-यहाँ जन्म लेती हैं मंगल ऋचाएँ

चित्र -साभार गूगल
संगम प्रयागराज


एक आस्था का गीत -संगम/कुम्भ


मिलन हो दोबारा

हमारा तुम्हारा ।

ओ संगम की रेती

ओ गंगा की धारा ।


ये यमुना की लहरें

किले की कहानी,

यहाँ संत ,साधू

यहाँ ब्रह्म ज्ञानी,

ये भक्ति का रंग

सारे रंगों से प्यारा ।


यहाँ लेटे हनुमान

की वन्दना है,

त्रिधारा से नदियों के

संगम बना है,

है इनकी कृपा से

हवन-यज्ञ सारा ।


सभा इंद्र की

इसकी महिमा को गाती,

छटा कुम्भ की

देव,मनुजों को भाती ,

कहीं भी नहा लो

है अमृत की धारा ।


ये तम्बू ये प्रवचन

अमौसा का मेला,

यहाँ भूला-बिसरा

न रहता अकेला,

जो खोया सभी ने

उसी को पुकारा ।

चित्र साभार गूगल


भारद्वाज ऋषि

राम सिय की कथाएँ,

यहाँ जन्म लेती हैं

मंगल ऋचाएँ,

इसे योगियों ने

सजाया सँवारा ।

कवि -जयकृष्ण राय तुषार