सुनहरी कलम से

हिन्दी गीत /नवगीत /ग़ज़ल

गुरुवार, 23 जनवरी 2025

मेरे कुम्भ गीत का नया अलबम -गायक श्री अनूप जलोटा जी एवं श्रीमती दीप्ति चतुर्वेदी

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  *यह प्रयाग है *मेरे कुम्भ गीत का अलबम रिलीज  गायक विख्यात भजन गायक पद्मश्री श्री अनूप जलोटा एवं श्रीमती दीप्ति चतुर्वेदी. संगीत श्री विवेक...
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सोमवार, 6 जनवरी 2025

एक ग़ज़ल -मौसम संवार दे

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  गोस्वामी तुलसीदास  एक ताज़ा ग़ज़ल  चित्र साभार गूगल  एक ग़ज़ल  पर्वत, नदी, दरख़्त, तितलियों को प्यार दे  अपनी हवस को छोड़ ये मौसम संवार दे  इतना ...
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गुरुवार, 26 दिसंबर 2024

ग़ज़ल -दर्द किनारों के साथ थे

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  चित्र साभार गूगल  भौँरे, तितलियाँ, फूल बहारों के साथ थे  सड़कों पे चंद लोग ही नारों के साथ थे  नदियों में पाप धोके सभी घर चले गए  सारे कटाव...
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गुरुवार, 19 दिसंबर 2024

एक ग़ज़ल -सभी के पाँव के घुँघरू बजे तो टूट गए

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  चित्र साभार गूगल  दिए बुझाती रही हैं सभी दिशाएं यहाँ  उजाले किसकी अदालत में सच बताएँ यहाँ  पढ़े लिखे भी यहाँ उलजुलूल बोल रहे  बिना तमीज़ के ...
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शनिवार, 7 दिसंबर 2024

एक मुलाक़ात -श्री विजय किरण आनंद मेलाधिकारी कुम्भ

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  मेलाधिकारी महाकुम्भ श्री विजय किरण आनंद  मेलाधिकारी कुम्भ श्री विजय किरण आनंद जी को फ्रेम किया कुम्भ गीत और कुछ पुस्तकें भेंट किया. मुलाक़ा...
शुक्रवार, 22 नवंबर 2024

एक ग़ज़ल -आगाज़ नए साल का भगवान नया हो

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  चित्र साभार गूगल  एक ग़ज़ल -आगाज़ नए साल का भगवान नया हो  मौसम की कहानी नई उनवान नया हो  आगाज़ नए साल का भगवान नया हो  फूलों पे तितलियाँ हों ब...
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बुधवार, 20 नवंबर 2024

एक ग़ज़ल -सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है

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चित्र -साभार गूगल  एक ग़ज़ल- सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है  गले में क्रॉस पहने है मगर चन्दन लगाती है सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती ...
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शनिवार, 16 नवंबर 2024

हिंदी ग़ज़ल का अक्षर पथ -एक आलोचनात्मक किताब

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  डॉ नित्यानंद श्रीवास्तव  हिंदी ग़ज़ल पर आलोचना की महत्वपूर्ण किताब  हिंदी का अक्षर पथ - लेखक डॉ नित्यानंद श्रीवास्तव  अभी अभी डाक से हिंदी ग़...
मंगलवार, 12 नवंबर 2024

एक ग़ज़ल -हर खिड़की में धूप -चाँदनी

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  चित्र साभार गूगल  एक ग़ज़ल -हर खिड़की में धूप -चाँदनी  शाम को दादी किस्से कई सुनाती है  बच्चों को भी सोनपरी ही भाती है  अपनी -अपनी नज़रों से स...
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सोमवार, 11 नवंबर 2024

एक ग़ज़ल -चिड़िया कभी गाती नहीं

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  चित्र साभार गूगल  चित्र साभार गूगल  एक ग़ज़ल -बाज़ से डरती अगर चिड़िया  सीखने संगीत विद्यालय कभी जाती नहीं  बाज़ से डरती अगर चिड़िया कभी गाती नह...
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जयकृष्ण राय तुषार
कवि नाम जयकृष्ण राय तुषार अधिवक्ता उच्च न्यायालय | जन्म स्थान -पसिका आज़मगढ़ ,उत्तर प्रदेश |सम्प्रति निवास -प्रयागराज | ग़ज़ल संग्रह -सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है *लोकभारती से प्रकाशित.देश की सुप्रसिद्ध पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में कविताओं का प्रकाशन | प्रथम गीत संग्रह -सदी को सुन रहा हूँ मैं ,दूसरा गीत संग्रह '"कुछ फूलों के कुछ मौसम के" उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से पुरस्कृत बलवीर सिंह रंग सर्जना पुरस्कार 2017. मेड़ों पर वसंत तीसरा नवगीत संग्रह प्रकाशन वर्ष 2021.
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