सुनहरी कलम से
हिन्दी गीत /नवगीत /ग़ज़ल
शनिवार, 4 मार्च 2023
माननीय न्यायधीश उच्चतम न्यायालय श्री पंकज मित्तल
›
माननीय न्यायमूर्ति उच्चतम न्यायालय श्री पंकज मित्तल जी माननीय न्यायमूर्ति उच्चतम न्यायालय श्री पंकज मित्तल जी
सोमवार, 6 फ़रवरी 2023
पद्मश्री शोभना नारायण जी से एक आत्मीय मुलाक़ात
›
पद्मश्री शोभना नारायण जी को पुस्तक भेंट करते हुए साथ में प्रयागराज संग्रहालय के निदेशक श्री राजेश प्रसाद श्री राजेश प्रसाद जी निदेशक संग्रह...
सोमवार, 25 जुलाई 2022
एक देशगान -फूल चढ़ाओ भारत माता को
›
भारत माता एक गीत -बलिदान करोड़ों वीरों का राजघाट से पहले फूल चढ़ाओ भारत माता को. फिर कोई भी फूल चढ़ाओ संविधान निर्माता को. आज़ादी में एक नहीँ ब...
गुरुवार, 14 जुलाई 2022
एक गीत -तैरती जलज्योति
›
निराला बैसवारे की मिट्टी में विख्यात कवि लेखक संपादक हुए हैं जिनमें निराला, रामविलास शर्मा, रसखान, नूर, मुल्ला दाऊद रमई काका, शिव मंगल सिंह...
2 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 8 जुलाई 2022
एक गीत -डॉ शिवबहादुर सिंह भदौरिया
›
[स्मृतिशेष ]कवि -डॉ ० शिव बहादुर सिंह भदौरिया एक गीत -कवि डॉ ० शिवबहादुर सिंह भदौरिया परिचय -डॉ 0शिवबाहादुर सिंह भदौरिया बैसवारे की मिट्...
6 टिप्पणियां:
रविवार, 15 मई 2022
दो गज़लें -शाम को कोई तो जगजीत सा गाता है यहाँ
›
चित्र साभार गूगल स्मृतिशेष जगजीत सिंह एक ग़ज़ल - शाम को कोई तो जगजीत सा गाता है यहाँ आदमी रंग का सपना लिए आता है यहाँ ये तो बाज़ार है हर रंग...
1 टिप्पणी:
एक गीत -राजा से मांगो मत काम कोई
›
चित्र साभार गूगल एक गीत -मोक्ष कहाँ देता है धाम कोई सबको सिंहासन ही चाहिए पर साथी कहना मत काम कोई। मौसम के हरकारे झूठे चुप रहते गर्मी,बरसात...
शुक्रवार, 13 मई 2022
एक गीत -संविधान में कहाँ लिखा है?
›
श्रीराम एक गीत -संविधान में कहाँ लिखा और ? संविधान में कहाँ लिखा है राष्ट्रपिता का काम । राष्ट्रपिता हो सकते केवल कृष्ण,भरत या राम । राष्...
गुरुवार, 5 मई 2022
एक ग़ज़ल -न पेड़ है न परिंदों का अब मकान कोई
›
सभार गूगल एक ताज़ा - ग़ज़ल न पेड़ है न परिंदों का अब मकान कोई सुकून बख़्स ज़मीं है न आसमान कोई चलो सितारों में ढूँढें नया ज़हान कोई तमाम नक़्शे ...
2 टिप्पणियां:
मंगलवार, 3 मई 2022
एक ग़ज़ल -सुर्खाब ग़ज़ल
›
चित्र सभार गूगल चित्र सभार गूगल एक ग़ज़ल -सुर्खाब ग़ज़ल शोख इठलाती हुई परियों का है ख़्वाब ग़ज़ल झील के पानी में उतरे तो है महताब ग़ज़ल वन में हिरन...
1 टिप्पणी:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें