सुनहरी कलम से

हिन्दी गीत /नवगीत /ग़ज़ल

सोमवार, 25 जुलाई 2022

एक देशगान -फूल चढ़ाओ भारत माता को

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भारत माता  एक गीत -बलिदान करोड़ों वीरों का राजघाट से पहले फूल चढ़ाओ भारत माता को. फिर कोई भी फूल चढ़ाओ संविधान निर्माता को. आज़ादी में एक नहीँ ब...
गुरुवार, 14 जुलाई 2022

एक गीत -तैरती जलज्योति

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निराला  बैसवारे की मिट्टी में विख्यात कवि लेखक संपादक हुए हैं जिनमें निराला, रामविलास शर्मा, रसखान, नूर, मुल्ला दाऊद रमई काका, शिव मंगल सिंह...
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शुक्रवार, 8 जुलाई 2022

एक गीत -डॉ शिवबहादुर सिंह भदौरिया

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  [स्मृतिशेष ]कवि -डॉ ० शिव बहादुर सिंह भदौरिया  एक गीत -कवि डॉ ० शिवबहादुर सिंह भदौरिया परिचय -डॉ 0शिवबाहादुर सिंह भदौरिया  बैसवारे की मिट्...
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रविवार, 15 मई 2022

दो गज़लें -शाम को कोई तो जगजीत सा गाता है यहाँ

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चित्र साभार गूगल स्मृतिशेष जगजीत सिंह  एक ग़ज़ल - शाम  को कोई तो जगजीत सा गाता है यहाँ आदमी  रंग का सपना लिए आता है यहाँ ये तो बाज़ार है हर रंग...
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एक गीत -राजा से मांगो मत काम कोई

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चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोक्ष कहाँ देता है धाम कोई सबको सिंहासन ही चाहिए पर साथी कहना मत काम कोई। मौसम के हरकारे झूठे चुप रहते गर्मी,बरसात...
शुक्रवार, 13 मई 2022

एक गीत -संविधान में कहाँ लिखा है?

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  श्रीराम  एक गीत -संविधान में कहाँ लिखा और ? संविधान में कहाँ लिखा है राष्ट्रपिता का काम । राष्ट्रपिता हो सकते केवल कृष्ण,भरत या राम । राष्...
गुरुवार, 5 मई 2022

एक ग़ज़ल -न पेड़ है न परिंदों का अब मकान कोई

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  सभार गूगल   एक ताज़ा - ग़ज़ल न पेड़ है न परिंदों का अब मकान कोई सुकून बख़्स ज़मीं है न आसमान कोई चलो सितारों में ढूँढें नया ज़हान कोई तमाम नक़्शे ...
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मंगलवार, 3 मई 2022

एक ग़ज़ल -सुर्खाब ग़ज़ल

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  चित्र सभार गूगल चित्र सभार गूगल एक ग़ज़ल -सुर्खाब ग़ज़ल शोख इठलाती हुई परियों का है ख़्वाब ग़ज़ल झील के पानी में उतरे तो है महताब ग़ज़ल वन में हिरन...
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रविवार, 1 मई 2022

एक ग़ज़ल -संगम प्रयागराज/कुम्भ

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  संगम प्रयागराज चित्र सभार गूगल एक अस्था की ग़ज़ल - संगम/महाकुम्भ कुछ दरिया,कुछ कश्ती में कुछ रेत में दीपक जलते हैँ संगम का अलबेला मौसम आओ हम...
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शनिवार, 30 अप्रैल 2022

एक देशगान -उठो अब मेरे हिंदुस्तान

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  चारो वेद आज़ादी के अमृत महोत्सव पर  एक देशगान उठो अब मेरे हिंदुस्तान तुम्हारे गौरव पर अभिमान यहां ऋषियों का अनुसन्धान सुनो वेदों का अमृत गा...
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जयकृष्ण राय तुषार
कवि नाम जयकृष्ण राय तुषार अधिवक्ता उच्च न्यायालय | जन्म स्थान -पसिका आज़मगढ़ ,उत्तर प्रदेश |सम्प्रति निवास -प्रयागराज | ग़ज़ल संग्रह -सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है *लोकभारती से प्रकाशित.देश की सुप्रसिद्ध पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में कविताओं का प्रकाशन | प्रथम गीत संग्रह -सदी को सुन रहा हूँ मैं ,दूसरा गीत संग्रह '"कुछ फूलों के कुछ मौसम के" उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से पुरस्कृत बलवीर सिंह रंग सर्जना पुरस्कार 2017. मेड़ों पर वसंत तीसरा नवगीत संग्रह प्रकाशन वर्ष 2021.
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