सुनहरी कलम से
हिन्दी गीत /नवगीत /ग़ज़ल
रविवार, 15 मई 2022
दो गज़लें -शाम को कोई तो जगजीत सा गाता है यहाँ
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चित्र साभार गूगल स्मृतिशेष जगजीत सिंह एक ग़ज़ल - शाम को कोई तो जगजीत सा गाता है यहाँ आदमी रंग का सपना लिए आता है यहाँ ये तो बाज़ार है हर रंग...
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एक गीत -राजा से मांगो मत काम कोई
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चित्र साभार गूगल एक गीत -मोक्ष कहाँ देता है धाम कोई सबको सिंहासन ही चाहिए पर साथी कहना मत काम कोई। मौसम के हरकारे झूठे चुप रहते गर्मी,बरसात...
शुक्रवार, 13 मई 2022
एक गीत -संविधान में कहाँ लिखा है?
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श्रीराम एक गीत -संविधान में कहाँ लिखा और ? संविधान में कहाँ लिखा है राष्ट्रपिता का काम । राष्ट्रपिता हो सकते केवल कृष्ण,भरत या राम । राष्...
गुरुवार, 5 मई 2022
एक ग़ज़ल -न पेड़ है न परिंदों का अब मकान कोई
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सभार गूगल एक ताज़ा - ग़ज़ल न पेड़ है न परिंदों का अब मकान कोई सुकून बख़्स ज़मीं है न आसमान कोई चलो सितारों में ढूँढें नया ज़हान कोई तमाम नक़्शे ...
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मंगलवार, 3 मई 2022
एक ग़ज़ल -सुर्खाब ग़ज़ल
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चित्र सभार गूगल चित्र सभार गूगल एक ग़ज़ल -सुर्खाब ग़ज़ल शोख इठलाती हुई परियों का है ख़्वाब ग़ज़ल झील के पानी में उतरे तो है महताब ग़ज़ल वन में हिरन...
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रविवार, 1 मई 2022
एक ग़ज़ल -संगम प्रयागराज/कुम्भ
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संगम प्रयागराज चित्र सभार गूगल एक अस्था की ग़ज़ल - संगम/महाकुम्भ कुछ दरिया,कुछ कश्ती में कुछ रेत में दीपक जलते हैँ संगम का अलबेला मौसम आओ हम...
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शनिवार, 30 अप्रैल 2022
एक देशगान -उठो अब मेरे हिंदुस्तान
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चारो वेद आज़ादी के अमृत महोत्सव पर एक देशगान उठो अब मेरे हिंदुस्तान तुम्हारे गौरव पर अभिमान यहां ऋषियों का अनुसन्धान सुनो वेदों का अमृत गा...
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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2022
एक ग़ज़ल -बहुत मौसम कमीना है
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चित्र सभार गूगल एक ग़ज़ल -बहुत मौसम कमीना है हवा में गर्द, आँधी, आग,गर्मी का महीना है बिना पानी का दरिया रेत में डूबा सफीना है कहीं सहरा,कही...
शनिवार, 23 अप्रैल 2022
एक ग़ज़ल-उतरा जमीं पे चाँद तो बरसात हो गयी
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चित्र साभार गूगल एक ग़ज़ल - उतरा ज़मीं पे चाँद तो बरसात हो गयी उतरा जमीं पे चाँद तो बरसात हो गयी बादल की दौड़-धूप से फिर रात हो गयी तस्वीर जि...
शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022
दो ग़ज़लें-भारतीय संस्कृति
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चित्र साभार गूगल दो ग़ज़लें-भारतीय धर्म-दर्शन पर विदेशी भौतिकता छोड़कर हमारी संस्कृति में शांति तलाश रहे हैं और हम पाश्चात्य संस्कृति में अश...
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