सुनहरी कलम से

हिन्दी गीत /नवगीत /ग़ज़ल

शुक्रवार, 30 मई 2025

नई किताब -सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है

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माननीय न्यायमूर्ति श्री पंकज मित्तल जी न्यायधीश उच्चतम न्यायालय प्रतिष्ठित परिवार में जन्म इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत फिर यहीँ पर माननीय न्...
गुरुवार, 8 मई 2025

एक देशगान -ये काशी का विहान है

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  भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री जी भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री जी भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी को समर्पित गीत अवधपुरी  की शाम है  ये काशी का...
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शुक्रवार, 2 मई 2025

सरस्वती सुमन का माहेश्वर तिवारी स्मृति अंक

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  स्मृति शेष माहेश्वर तिवारी समीक्षा- गीत की बांसुरी थे माहेश्वर तिवारी कीर्तिशेष नवगीतकार माहेश्वर तिवारी जी की स्मृति में देहरादून से प्रक...
मंगलवार, 29 अप्रैल 2025

एक देशगान -वीरों सरहद पार करो

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तिरंगा   विष्णु अवतार भगवान परशुराम परशुराम के  जन्मदिवस पर  वीरों सरहद पार करो. भारत माता  की जय बोलो  दुश्मन का संहार करो. काहूटा को  राख ...
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मंगलवार, 22 अप्रैल 2025

एक देशगान -बाज़ उड़ाओ

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  भारत माता देशगान - एक भिखारी मुल्क  चुनौती  देता हिंदुस्तान को. दुनिया के  नक्शे से गायब कर दो पाकिस्तान को, बाज़ उड़ाओ  श्वेत कबूतर  कब तक ...
सोमवार, 21 अप्रैल 2025

श्री आमोद माहेश्वरी जी लोक भारती में आज

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  लोकभारती प्रयागराज के दफ़्तर में राजकमल, लोकभारती, एवं राधाकृष्ण के मुख्य कार्यकारी श्री आमोद माहेश्वरी जी साथ में श्री रमेश ग्रोवर जी, भाई...

एक देशगान -जागो फिर वैशाली

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  एक देश गान -जागो फिर वैशाली  चित्र साभार गूगल चित्र साभार गूगल एक देशगान-जागो फिर वैशाली तक्षशिला, नालंदा जागो  जागो फिर वैशाली. जागो फिर ...
रविवार, 13 अप्रैल 2025

एक देशगान -रामकृष्ण बंकिम सुभाष का चंदन वन मुरझाया है

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  चित्र साभार गूगल चित्र साभार गूगल क्रांति गीत -अब सोये बंगाल को मिलजुलकर  आवाज़ लगाओ  अब सोये बंगाल को. गंगासागर के  सीने पर  रक्खा किसने ब...
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गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

एक दिन लोकभारती प्रेस में विद्वानों के साथ

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 विगत सप्ताह साहित्य और प्रकाशन जगत की दो महान विभूतियों से लोकभारती /राजकमल प्रकाशन में आत्मीय मुलाक़ात हुई. इलाहाबाद विश्व विद्यालय के हिन्...
बुधवार, 26 मार्च 2025

एक ताज़ा गीत -चैत्र रामनवमी भी आनेवाली है

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  चित्र साभार गूगल चित्र साभार गूगल चित्र साभार गूगल एक ताज़ा गीत - सुबह  परी सी बन्द खिड़कियाँ खोल रही. फूल गली  फिर राधे - राधे बोल रही. गोक...
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जयकृष्ण राय तुषार
कवि नाम जयकृष्ण राय तुषार अधिवक्ता उच्च न्यायालय | जन्म स्थान -पसिका आज़मगढ़ ,उत्तर प्रदेश |सम्प्रति निवास -प्रयागराज | ग़ज़ल संग्रह -सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है *लोकभारती से प्रकाशित.देश की सुप्रसिद्ध पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में कविताओं का प्रकाशन | प्रथम गीत संग्रह -सदी को सुन रहा हूँ मैं ,दूसरा गीत संग्रह '"कुछ फूलों के कुछ मौसम के" उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से पुरस्कृत बलवीर सिंह रंग सर्जना पुरस्कार 2017. मेड़ों पर वसंत तीसरा नवगीत संग्रह प्रकाशन वर्ष 2021.
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