सुनहरी कलम से

हिन्दी गीत /नवगीत /ग़ज़ल

रविवार, 28 फ़रवरी 2021

एक ग़ज़ल -कोई आज़ाद बतलाओ कि जो आज़ाद जैसा है

›
   चित्र -साभार गूगल  एक ग़ज़ल - कोई आज़ाद बतलाओ कि जो आज़ाद जैसा है  तुम्हारा जन्म भारत भूमि पर अपवाद जैसा है  कोई आज़ाद बतलाओ कि जो आज़ाद जैसा ह...

एक ग़ज़ल -रंग पिचकारी लिए मौसम खड़ा

›
  चित्र -साभार गूगल  एक ग़ज़ल - रंग- पिचकारी लिए मौसम खड़ा   ख़त 'बिहारी' लिख रहा होकर विकल  ऐ मेरे 'जयसिंह 'मोहब्बत से निकल  फि...
रविवार, 21 फ़रवरी 2021

एक आस्था का गीत-राम तुम्हारे निर्वासन को दुनिया रामकथा कहती है

›
  प्रभु श्रीराम एक गीत आस्था का राम तुम्हारे निर्वासन को दुनिया राम कथा कहती है राम तुम्हारे निर्वासन को दुनिया रामकथा कहती है । इसकी पीड़ा स...
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

कुछ दोहे -हल्दी के छापे लगें कोहबर गाये गीत

›
  चित्र -साभार गूगल  आस्था और प्रेम के दोहे  तम के आँगन को मिले पावन ज्योति अमन्द   केसर ,चन्दन शुभ लिखें घर -घर हो मकरंद  हे मैहर की शारदा ...
सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

एक ग़ज़ल -मढ़ेंगे किस तरह इस मुल्क की तस्वीर सोने में

›
  चित्र -साभार गूगल  एक ग़ज़ल - मढ़ेंगे किस तरह इस मुल्क की तस्वीर सोने में  मढ़ेंगे किस तरह भारत की हम तस्वीर सोने में  लगे हैं मुल्क के गद्दार...

एक गीत -अबकी शाखों पर वसंत तुम

›
  चित्र -साभार गूगल  एक गीत -अबकी शाखों पर वसंत तुम  अबकी शाखों पर  वसंत तुम  फूल नहीं रोटियाँ खिलाना | युगों -युगों से  प्यासे होठों को  अप...
सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

एक आस्था का गीत-यहाँ जन्म लेती हैं मंगल ऋचाएँ

›
चित्र -साभार गूगल संगम प्रयागराज एक आस्था का गीत -संगम/कुम्भ मिलन हो दोबारा हमारा तुम्हारा । ओ संगम की रेती ओ गंगा की धारा । ये यमुना की लहर...
1 टिप्पणी:
रविवार, 31 जनवरी 2021

एक ग़ज़ल -मगर संगम के लिए जल की त्रिधारा चाहिए

›
    एक ग़ज़ल - मगर संगम के लिए जल की त्रिधारा चाहिए   उसको धरती ,चाँद ,सूरज और सितारा चाहिए  मुझको कुछ कागज ,कलम और दोस्त प्यारा चाहिए  डूबने ...
बुधवार, 27 जनवरी 2021

एक ग़ज़ल -पूनम की रात चाँद बहुत सादगी में है

›
  चित्र -साभार गूगल  चित्र साभार गूगल  एक ग़ज़ल - पूनम की रात चाँद बहुत सादगी में है  ये सारा आसमान  आज दिल्लगी में है  पूनम की रात चाँद बहुत ...
रविवार, 17 जनवरी 2021

एक ग़ज़ल -यह मुल्क सभी का है देखभाल कीजिए

›
  चित्र -साभार गूगल  एक ताज़ा ग़ज़ल - यह देश सभी का है देखभाल कीजिए  यह मुल्क सभी का है देखभाल कीजिए  हर बात पे मियाँ नहीं हड़ताल कीजिए  पहले जब...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें
मेरी फ़ोटो
जयकृष्ण राय तुषार
कवि नाम जयकृष्ण राय तुषार अधिवक्ता उच्च न्यायालय | जन्म स्थान -पसिका आज़मगढ़ ,उत्तर प्रदेश |सम्प्रति निवास -प्रयागराज | ग़ज़ल संग्रह -सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है *लोकभारती से प्रकाशित.देश की सुप्रसिद्ध पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में कविताओं का प्रकाशन | प्रथम गीत संग्रह -सदी को सुन रहा हूँ मैं ,दूसरा गीत संग्रह '"कुछ फूलों के कुछ मौसम के" उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से पुरस्कृत बलवीर सिंह रंग सर्जना पुरस्कार 2017. मेड़ों पर वसंत तीसरा नवगीत संग्रह प्रकाशन वर्ष 2021.
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.