सोमवार, 31 अगस्त 2026

मुलाक़ात और पुस्तक भेंट

 

श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी 
वित्त नियंत्रक उच्च शिक्षा 

आज उच्च शिक्षा निदेशालय में वित्त नियंत्रक आदरणीय श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी से सहृदय मुलाक़ात हुई. आज की मुलाक़ात काफ़ी अरसा बाद हुई है.त्रिपाठी जी वित्त नियंत्रक उच्च शिक्षा. राजेंद्र प्रसाद उर्फ़ रज्जू भैया विश्व विद्यालय में भी कार्यरत हैं. ब्लॉगर भी हैं साहित्यिक अभिरूचि के हैं. दूसरी तसवीर जौनपुर के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व आदरणीय श्री परमानंद झा सर की है. झा साहब भी साहित्यिक अभिरूचि के हैं. आप सभी का दिन शुभ हो.

श्री परमानन्द झा 
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व 
जौनपुर 


शनिवार, 22 अगस्त 2026

एक पुराना गीत -साड़ी शिफ़ान की

चित्र साभार गूगल 



चित्र -साभार गूगल 


एक गीत -मौसम में खुशबू है इतर और पान की 

हाथों में 

मेहँदी है 
साड़ी शिफ़ान की |
मौसम में 
खुशबू है 
इतर और पान की |

रस्ते में
फिसलन है 
दिन है आषाढ़ का ,
नदियों का 
मंसूबा है 
शायद बाढ़ का ,
खेत में 
कछारों में 
हरियाली धान की |

घोंसले
बया के हैं
पेड़ हैं बबूलों के,
तन-मन
सब भींग रहे
वन,उपवन,फूलों के,
नाचते 
मयूरों से 
शोभा सिवान की |

हरे पेड़ 
उलझे हैं 
बिजली के तारों से ,
खिड़की के 
पाट खुले 
पुरवा बौछारों से ,

सोने की 
बाली फिर 
गुम दायें कान की |

गुड़हल के 
लाल ,पीत- 
फूल हैं कनेरों के ,
मेघों के 
घेरे में 
सूर्य हैं सवेरों के ,
रह -रह के 
बजती है 
पायल सीवान की |
कवि -जयकृष्ण राय तुषार 
चित्र -साभार गूगल 



रविवार, 16 अगस्त 2026

एक ग़ज़ल -कहीं से लौट के आऊँ

 

हरद्वार गंगा चित्र साभार गूगल 

एक पुरानी ग़ज़ल -कहीं से लौट के आऊँ 

चित्र साभार गूगल 

फूलों की घाटी हिमालय 


एक ग़ज़ल देश के नाम -


कहीं से लौट के आऊँ तुझी से प्यार रहे 


हवा ,ये फूल ,ये खुशबू ,यही गुबार रहे 

कहीं से लौट के आऊँ तुझी से प्यार रहे 


मैं जब भी जन्म लूँ गंगा तुम्हारी गोद रहे 

यही तिरंगा ,हिमालय ये हरसिंगार रहे 


बचूँ तो इसके मुकुट का मैं मोरपंख बनूँ 

मरूँ  तो नाम शहीदों में ये शुमार रहे 


ये मुल्क ख़्वाब से सुंदर है जन्नतों से बड़ा 

यहाँ पे संत ,सिद्ध और दशावतार रहे 


मैं जब भी देखूँ लिपट जाऊँ पाँव को छू लूँ 

ये माँ का कर्ज़ है चुकता न हो उधार रहे 


भगत ,आज़ाद औ बिस्मिल ,सुभाष भी थे यहीं 

जो इन्क़लाब लिखे सब इन्हीं के यार रहे 


आज़ादी पेड़ हरा है ये मौसमों से कहो 

न सूख पाएँ परिंदो को एतबार रहे 


तमाम रंग नज़ारे ये बाँकपन ये शाम 

सुबह के फूल पे कुछ धूप कुछ 'तुषार 'रहे 



कवि /शायर -जयकृष्ण राय तुषार 

चित्र -साभार गूगल 

चित्र साभार गूगल 

मंगलवार, 11 अगस्त 2026

तीन अगस्त कवि दिवस पर कवि गोष्ठी

 

हिंदुस्तानी एकेडमी की कोषाधिकारी श्रीमती पायल सिंह जी 
मुझे सम्मानित करते हुए 
मंच पर काव्य पाठ करते हुए मेरी तसवीर 


विगत 3 अगस्त को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी के जन्मदिवस पर हिंदुस्तानी एकेडमी से कई वर्ष बाद काव्य पाठ का आमंत्रण मिला. हिंदुस्तानी एकेडमी की कोषाधिकारी श्रीमती पायल सिंह जी के प्रति हृदय से कृतज्ञ हूँ. 3अगस्त को डॉ जगदीश गुप्त जी का जन्मदिवस मनाया जाता है उनको भी कार्यक्रम समर्पित था. कुछ दिनों से फेसबुक से विरक्त था. शुभ संध्या.


यादगार पल 


श्रीमती पायल सिंह कवियों का स्वागत करते हुए 


राष्ट्कवि मैथिलिशरण गुप्त का जन्मदिन कवि दिवस के रूप 
में हिंदुस्तानी एकेडमी मनाती है. डॉ जगदीश गुप्त जी का भी 
जन्मदिन 3 अगस्त है 

अविस्मरणीय पल 

पुष्पांजलि अर्पण