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बुधवार, 23 अक्तूबर 2013

लोकप्रिय शायर मेराज फैज़ाबादी की ग़ज़लें

लोकप्रिय शायर मेराज फैज़ाबादी 
जन्म -02-01-1941 से 30-11-2013
हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते 
तेरी यादों को भी रुसवा नहीं होने देते 


मुझको थकने नहीं देता ये जरूरत का पहाड़ 
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते 
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मोहब्बत को मेरी पहचान कर दे 
मेरे मौला मुझे इन्सान कर दे 

मोहब्बत प्यार रिश्ते -भाई चारा 
हमारे दिल को हिंदुस्तान कर दे 
                                                मेराज फैज़ाबादी 
परिचय -
उर्दू शायरी में या हिन्दुस्तानी तरक्की पसंद शायरी में मेराज फैज़ाबादी का नाम बहुत अदब से लिया जाता है |बहुत कम शायर हैं जो लगातार कवि सम्मेलनों और मुशायरों में व्यस्त रहने और लोकप्रिय हो जाने के बाद भी अपनी शायरी को हल्का नहीं होने देते | कुछ ऐसे ही चुनिन्दा शायरों में मेराज फैज़ाबादी का नाम हम ससम्मान ले सकते हैं |मेराज फैज़ाबादी की शायरी में भारतीय दर्शन और सूफ़ी रहस्यवाद के भी दर्शन होते हैं |यह शायर हिन्दुस्तानी तहजीब और तरक्की पसंद शायरों की फेहरिश्त में बहुत ऊँचा मकाम रखता है |बहुत आसान जबान में अपनी बात को शायरी के माध्यम से कह देने की महारत मेराज साहब को बखूबी आती है |मुशायरों में देश -विदेश की यात्रायें कर चुके मेराज साहब का जन्म फैज़ाबाद के मौजा कोला में एक जमींदार परिवार में  02-01-1941 को हुआ था |इनके पिता सैय्यद सिराजुल हक़ सरकारी मुलाजिम थे |मेराज साहब ने कभी किसी को अपना उस्ताद नहीं बनाया | मेराज साहब स्वभाव से बहुत ही मिलनसार हैं | एक अच्छे शायर के साथ एक बेहतरीन इन्सान भी हैं | कबीर की तरह दो टूक बोलने वाले मेराज साहब की तरफ़ सत्ता की निगाह नहीं गयी वरना इतने बड़े शायर को अब तक कई बड़े पुरस्कार मिल जाने चाहिए थे | इन दिनों मेराज साहब कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं | काश सरकार इन्हें यश भारती ही दे देती तो कुछ इस शायर का सम्मान हो जाता और उर्दू हिंदी संस्थानों का पाप कुछ कम हो जाता | मेराज फैज़ाबादी की उर्दू में कुल चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं -बेख्वाब साअतें ,सबात ,दायम और नामूस  हिंदी में थोडा सा चन्दन प्रकाशित है | मेराज साहब की गजलों को लता मंगेशकर ,जगजीत सिंह और अज़ीज़ नाजा ने अपना स्वर दिया है | हिंदुस्तान की तहजीब और अवध की संस्कृति की नुमान्दगी करने वाले इस महान शायर को मेरा सलाम | मेराज साहब के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के साथ उनके रचना संसार से आज हम आपने अंतर्जाल के पाठकों को सुपरिचित करा रहे हैं |मेराज फैज़ाबादी का सम्पर्क नम्बर है -09839726543 यह नम्बर उनके बड़े सुपुत्र जनाब नदीम का है दूसरा नम्बर o9454596662 उनके पुत्र जनाब फराज का है |मेराज साहब की अस्वस्थता के कारण उनका व्यक्तिगत  नम्बर देना यहाँ उचित नहीं है | इस समय मेराज फैज़ाबादी अपने लखनऊ स्थित आवास में रहते हैं |सादर [संशोधन -दिनांक 30-11-2013 को इस मशहूर शायर का लखनऊ में निधन हो गया ]
मेराज फैज़ाबादी की ग़ज़लें 
एक 
तेरे बारे में जब सोचा नहीं था 
मैं तन्हा था मगर इतना नहीं था 

तेरी तस्वीर से करता था बातें 
मेरे कमरे में आईना नहीं था 

समन्दर ने मुझे प्यासा ही रखा 
मैं जब सहरा में था प्यासा नहीं था 

वो जिसने तोड़ दी सांसों की जन्जीर 
वह था मजबूर दीवाना नहीं था 

मनाने रूठने के खेल में हम 
बिछड़ जायेंगे मैं यह सोचा नहीं था 

सुना है बन्द कर ली उसने ऑंखें 
कई रातों से वह सोया नहीं था 

गुज़र जा इस तरह दुनिया से मेराज 
कि जैसे तू यहाँ आया नहीं था 
दो 
किसी से यूँ भी कभी रस्मो राह हो जाये 
कि अपने आप से मिलना गुनाह हो जाये 

तअल्लुक़ात की इस दास्ताँ को तूल न दे 
यही बहुत है कि दो दिन निबाह हो जाये 

वह जिसने तेरी मुहब्बत खरीद ली जानाँ 
खुदा करे कि वही बादशाह हो जाये 

सुबूत हम से हमारी वफ़ा का जब मांगे 
तो उसका दिल ही हमारा गवाह हो जाये 

बलन्दियों पे नज़र आ रहे हैं कुछ बौने 
अजब नहीं कि ये दुनिया तबाह हो जाये 
तीन 
भींगती आँखों के मन्ज़र नहीं देखे जाते 
हमसे अब इतने समुन्दर नहीं देखे जाते 

उससे मिलना है अगर सादा मिज़ाजी से मिलो 
आइने भेष बदल कर नहीं देखे जाते 

वज़अदारी तो बुजुर्गों की अमानत है मगर 
अब ये बिकते हुए ज़ेवर नहीं देखे जाते 

जिन्दा रहना है तो हालात से डरना कैसा 
जंग लाज़िम हो तो लश्कर नहीं देखे जाते 

संगसारी तो मुकद्दर है हमारा लेकिन 
आप के हाथ में पत्थर नहीं देखे जाते 

जिसके दम से थी मेरे गाँव की रौनक़ मेराज 
उस हवेली में कबूतर नहीं देखे जाते 
चार 
हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते 
तेरी यादों को भी रुसवा नहीं होने देते 

कुछ तो हम खुद भी नहीं चाहते शोहरत अपनी 
और कुछ लोग भी ऐसा नहीं होने देते 

अज़मतें अपनी चराग़ों को बचाने के लिए 
हम किसी घर में उजाला नहीं होने देते 

ज़िक्र करते हैं तेरा नाम नहीं लेते हैं 
हम समुन्दर को जज़ीरा नहीं होने देते 

मुझको थकने नहीं देता ये जरूरत का पहाड़ 
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते 
पांच 
चिराग़ अपनी थकन की कोई सफाई न दे 
वो तीरगी है कि अब ख़्वाब तक दिखाई न दे 

बहुत सताते हैं रिश्ते जो टूट जाते हैं 
ख़ुदा किसी को भी तौफीक़े आशनाई न दे 

मैं सारी उम्र अंधेरों में काट सकता हूँ 
मेरे दियों को मगर रोशनी पराई न दे 

मसर्रतों में भी जागे गुनाह का एहसास 
मेरे वजूद को इतनी भी पारसाई न दे 

अगर यही तेरी दुनिया का हाल है या रब 
तो मेरे क़ैद भली है मुझे रिहाई न दे 

दुआ ये मांगी है सहमे हुए मोअर्रिख ने 
कि अब क़लम को खुदा सुर्ख रोशनाई न दे 
छः 
बे ख़्वाब साअतों का परस्तार कौन है 
इतनी उदास रात में बेदार कौन है 

फिर किस को ज़िन्दगी ने तमाशा बना दिया 
आईना देखने का ख़तावार कौन है 

सब कश्तियाँ जला के चले साहिलों से हम 
अब तुमसे क्या बतायें कि उस पार कौन है 

इस पार मैं हूँ मेरे मसाइल हैं दोस्तों 
सांसों की इस फ़सील के उस पार कौन है 

किसको यह फ़िक्र है कि कबीले का क्या हुआ 
सब इस पे लड़ रहे हैं कि सरदार कौन है 

दीवार पर सजा तो दिये बागियों के सर 
अब ये देख लो पसे दीवार कौन है 

सरहद पे इम्तेहान वफादारियों का हो 
शहरों में हो ये बहस कि गद्दार कौन है 

यह फैसला तो वक़्त भी शायद न कर सके 
सच कौन बोलता है अदाकार कौन है 
सात 
तख़्ते शाही कि हवस क्या ये गदाई है बहुत 
हम फ़क़ीरों के लिए एक चटाई है बहुत 

हों मुबारक तुम्हें दुनिया के खज़ाने लोगों 
हमको मेहनत की ये थोड़ी कमाई है बहुत 

दुश्मनी करने से पहले कभी सोचा होता 
दोस्ती अपने बुजुर्गों ने निभाई है बहुत 

शहर तक आये तो संजीदा नज़र आने लगे 
हमने सहरा में मगर ख़ाक उड़ाई है बहुत 

रोशनी बांटते रहने की कसम खाई थी 
कुछ चरागों ने मगर आग लगाई है बहुत 

आठ -मेराज फैज़ाबादी की हस्तलिपि में  एक ग़ज़ल 


सुनहरी कलम से 

मुझे खुशी है कि मेराज फैज़ाबादी का कविता संग्रह 'थोड़ा सा चन्दन 'प्रकाशित हो रहा है | मेराज फैज़ाबादी मुझे दीदी कहते हैं और इस रिश्ते से वह मेरे छोटे भाई हुए | उनकी ग़ज़लें भी मुझे अच्छी लगती हैं |मेरी तरफ़ से मेराज फैज़ाबादी को 'थोड़ा सा चन्दन 'के प्रकाशन पर शुभकामना और आशीर्वाद | परमात्मा करे इस थोड़े से चन्दन की खुशबू दूर -दूर तक फैले |
सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर [पुस्तक के कवर पृष्ठ से साभार ]


आत्मकथ्य -
बहरे हाल ,मैं यूँ ही गिरता पड़ता मुशायरों का सफ़र करता रहा | मैं जानता हूँ कि मैं मीर ,ग़ालिब ,मोमिन ,इक़बाल नहीं बन सकता लिहाजा मैंने मुशायरों पर ही क़नाअत कर ली | इस सफ़र के दौरान मुझे बहुत से शायरों की मोहब्बतें भी मिली जिन में खुमार साहब ,वसीम भाई ,कृष्ण बिहारी नूर वगैरह खास तौर से क़ाबिले ज़िक्र हैं और बहुत से लोगों की मुखालिफतों का भी सामना करना पड़ा मगर मैंने कभी उसकी तरफ़ तवज्जो नहीं की ,कि मुझे अपने अल्लाह पर भरोसा था | सन 1987 तक मैं पूरे मुल्क के मुशायरों में मक़बूल हो चुका था | 1987 में पहली बार कराची गया | 1989 में पहली बार दुबई गया जिसका किस्सा भी दिलचस्प है मगर फिर कभी सही | ख़लीज और अमीरात का सफ़र होता रहा फिर 1992 में जेद्दाह गया और उमराह की सआदत और मदीना मुनव्वरा की ज़ियारत से सरफराज़ हुआ | 1995 में पहली बार अमेरिका में हाज़री हुई .....और जब से खाना बदोशी का ये सिलसिला लगातार जारी है | इस यकीन के साथ कि 'इरादे नेक हों तो मज़िलें कदमो तक आती हैं 'कोई ठोकर हो ख़ामोशी से रस्ता छोड़ देती है '
शायर मेराज फैज़ाबादी की कलम से [ थोड़ा सा चन्दन ग़ज़ल संग्रह से ]

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (24-10-2013)
    "प्याज का अथाह भँडार है" चर्चा - 1408 में "मयंक का कोना"
    पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आभार एक सुन्दर संग्रह से परिचय करवाने के लिए

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  3. उम्दा पोस्ट ...मेरे भी ब्लॉग पर आये

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  4. आभार साझा करने का .... एक पठनीय पोस्ट

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  5. मेराज़ साहब की लाजवाब गज़लों का आनद आ गया ... बहुत शुक्रिया इनको साझा करने का ...

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  6. मुझको थकने नहीं देता ये जरूरत का पहाड़
    मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते

    क्या ग़ज़लें हैं भाई

    एक दम अलग और समाज के बीच के शेर

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  7. मेराज़ साब मेरे महबूब शायर हैं .... उनके बारे में अब क्या कहूँ!

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  8. मेराज साहब से परिचय कर बहुत अच्छा लगा -आभार !

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति...दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@जब भी जली है बहू जली है

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  10. मेराज फैज़ाबादी साहब से परि‍चय करवाने के लि‍ए आपका आभार जी

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  11. बहुत बढ़िया प्रस्तुति...आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

    नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-तुमसे कोई गिला नहीं है

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  12. बहूत खूब मेरी सरज़मीं का नाम रोशन किया मीर अनीस और मेहराज साहब ने बॉयज़ ए फक्र है के मैं फैजाबादी हूं।

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