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रविवार, 2 दिसंबर 2012

लोकप्रिय हिंदी कवि -हरिवंश राय बच्चन ,मधुशाला और उनकी कुछ अन्य कविताएँ

लोकप्रिय कवि -हरिवंश राय बच्चन
समय -27-11-1907 से 18-01-2003]
मधुशाला और हरिवंश राय बच्चन एक दूसरे के पर्याय हो चुके हैं |अपने जीवन काल में बच्चन जी कवि सम्मेलनों के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में से एक थे | हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27-11-1907 को इलाहाबाद के मोहल्ला चक के एक मकान में हुआ था |आज वह मकान विद्यमान नहीं है और उस स्थान पर जीरो रोड गुजर रही है |बचपन से इंटर प्रथम वर्ष तक बच्चन जी इसी मकान में रहे | सन 1926 में उनका परिवार मोहल्ला चक से मुठ्ठीगंज चला आया [इलाहाबाद में ही ] सन 1929 में बच्चन जी ने इलाहाबाद विश्व विद्यालय से बी० ए० की परीक्षा पास की ,पाश्चात्य दर्शन ,हिंदी और अंग्रेजी उनके विषय थे |बच्चन जी के पिता पायनियर प्रेस में काम करते थे |बच्चन जी के एक छोटा भाई और दो बहनें जिनमें एक उनसे बड़ी और दूसरी छोटी थी |बी० ए० प्रथम वर्ष के दौरान ही श्यामा से उनका विवाह हो गया था | सन 1930 में बच्चन जी ने एम० ए० प्रथम वर्ष उत्तीर्ण किया और गाँधी जी का असहयोग आन्दोलन शुरू होने के कारण पढाई छोड़ दिया |जिसे दुबारा सन 1937-38 में पूरा किया | इसी वर्ष बच्चन जी ने  बनारस ट्रेनिंग कालेज में प्रवेश लिया | उन दिनों बच्चन जी लाहौर काफी आने -जाने लगे थे | 24 -01 1942 को बच्चन जी का तेजी बच्चन से विवाह हुआ | तेजी उन दिनों लाहौर में एफ़० सी० कालेज में मनोवज्ञान की अध्यापिका थीं | विवाह से कुछ दिन पूर्व ही बच्चन जी इलाहाबाद विश्व विद्यालय में जूनियर प्रवक्ता हो गये थे |इस समय तक बच्चन जी की ख्याति भारत भर में फ़ैल गयी थी | कुछ दिनों बाद प्रथम पत्नी श्यामा जी का निधन हो गया बच्चन जी गहन वेदना से पीड़ित होकर अमरकृति निशा निमन्त्रण रचते हैं |बच्चन जी का परिचय बहुत व्यापक है यहाँ सब कुछ लिखना संभव नहीं है | सन 1941 से 1952 तक इलाहाबाद विश्व विद्यालय में अंगेजी के प्रवक्ता | 1952 से लेकर 54 तक इंग्लैण्ड में यीट्स के काव्य पर शोध कार्य ,फलस्वरूप कैम्ब्रिज विश्व विद्यालय से पी० एच० डी० की उपाधि |कुछ मास तक आकाशवाणी इलाहाबाद में प्रोड्यूसर |इसके बाद 16 वर्षों तक दिल्ली ,10 वर्ष तक विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ |छः वर्षों तक राज्य सभा के मनोनीत सदस्य रहे |अजिताभ बच्चन और अमिताभ बच्चन जैसे महान अभिनेता इस महान कवि के ही पुत्र हैं |प्रमुख कृतियाँ - मधुशाला ,मधुबाला ,मधुकलश ,निशा निमन्त्रण ,एकांत संगीत ,आकुल अंतर ,सतरंगिनी ,हलाहल ,बंगाल का काल ,खादी के फूल .सूत की माला ,मिलन यामिनी ,प्रणय पत्रिका ,बुद्ध और नाचघर ,त्रिभंगिमा आदि |क्या भूलूं क्या याद करूं ,नीड़ का निर्माण फिर ,बसेरे से दूर ,दसद्वार से सोपान तक [आत्मकथा खंड ]प्रवास की डायरी [डायरी ]कवियों में सौम्य संत ,नये -पुराने झरोखे ,टूटी फूटी कड़ियाँ [आलोचना निबन्ध तथा खय्याम और शेक्सपीयर के अनुवाद आदि |आज हम बच्चन जी के परिचय और उनके  कुछ काव्य सुमनों के साथ  आपके सम्मुख उपस्थित हैं |आभार सहित 
हिंदी के लोकप्रिय कवि हरिवंश राय बच्चन ,मधुशाला और कुछ अन्य चुनिन्दा कविताएँ 
एक 
निशा -निमंत्रण 
दिन जल्दी -जल्दी ढलता है 

हो जाय न पथ में रात कहीं 
मंजिल भी तो है दूर नहीं -
यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी -जल्दी चलता है 
दिन जल्दी -जल्दी ढलता है 

बच्चे प्रत्याशा में होंगे 
नीड़ों से झांक रहे होंगे -
यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है 
दिन जल्दी -जल्दी ढलता है 

मुझसे मिलने को कौन विकल 
मैं होऊं किसके हित चंचल 
यह प्रश्न शिथिल करता पद को ,भरता उर में विह्वलता है 
दिन जल्दी -जल्दी ढलता है 
दो 
साथी नया वर्ष आया है 

वर्ष पुराना ले अब जाता 
कुछ प्रसन्न -सा कुछ पछताता 
दे जी भर आशीष बहुत ही इससे तूने दुःख पाया है 
साथी नया वर्ष आया है 

उठ इसका स्वागत करने को 
स्नेह- बाहुओं में भरने को 
नए साल के लिए देख यह नयी वेदनाएं लाया है 
साथी नया वर्ष आया है 

उठ ओ पीड़ा के मतवाले 
ले ये तीक्ष्ण -तिक्त कटु प्याले 
ऐसे ही प्यालों का गुण तो तूने जीवन भर गाया है 
साथी नया वर्ष आया है 
तीन 
इस पार -उस पार 
इस पार प्रिये ,मधु है ,तुम हो ,उस पार न जाने क्या होगा 

यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन का 
लहरा -लहरा यह शाखाएं कुछ शोक भुला देतीं मन का 
कल मुर्झानेवाली कलियाँ हंसकर कहतीं हैं मग्न रहो 
बुलबुल तरु की फुनगी पर से सन्देश सुनाती यौवन का 

तुम देकर मदिरा के प्याले मेरा मन बहला देती हो 
उस पार मुझे बहलाने का उपचार न जाने क्या होगा 
इस पार प्रिये मधु है तुम हो उस पार न जाने क्या होगा 

जग में रस की नदियाँ बहतीं ,रसना दो बूंदे पाती हैं 
जीवन की झिलमिल सी झांकी नयनों के आगे आती है 
स्वर -तालमयी वीणा  बजती ,मिलती है बस झंकार मुझे 
मेरे सुमनों की गंध कहीं यह वायु उड़ा ले जाती है 

ऐसा सुनता उस पार प्रिये ,ये साधन भी छिन जायेंगे 
तब मानव की चेतनता का आधार न जाने क्या होगा 
इस पार प्रिये मधु है तुम हो उस पार न जाने क्या होगा 
चार 
शहीद की माँ 
इसी घर में 
एक दिन 
शहीद का जनाज़ा निकला था 
तिरंगे में लिपटा 
हजारों की भीड़ में 
कांधा देने की होड़ में 
सैकड़ों के कुरते फटे थे 
पुट्टे छिले थे 
भारत माता की जय 
इन्कलाब जिंदाबाद 
अंग्रेजी सरकार मुर्दाबाद 
के नारों में शहीद का रोदन 
डूब गया था 
उसके आंसुओं की लड़ी 
फूल ,खील ,बताशों की झड़ी में 
छिप गयी थी -
जनता चिल्लाई थी 
तेरा नाम सोने के अक्षरों में लिखा जायेगा 
गली किसी गर्व से 
छिप गयी थी 

इसी घर से 
तीस बरस बाद 
शहीद की माँ का जनाज़ा निकला है 
तिरंगे में लिपटा नहीं 
[क्योंकि वहखास -खास लोंगों के लिए विहित है ]
केवल चार काधों पर 
राम -नाम सत्य है 
के पुराने नारों पर 
चर्चा है बुढ़िया बेसहारा थी 
जीवन के कष्टों से मुक्त हुई 
गली किसी राहत से छुई -छुई |
पांच -
तुखारा का प्रेम -गीत 
सीवान किनारे टीलों के 
इन फूलों में क्या है 
जो इनको देख सदा 
मैं याद तुम्हें कर लेता हूँ |

तुममें क्या है -
केशों में ,अधर ,कपोलों में -
जो इन फूलों को देख सदा 
मैं तुम्हें याद कर लेता हूँ |

मुझमें क्या है -
आहों में आंसू में ,गीतों में -
जो देख सदा इन फूलों को 
मैं याद तुम्हें कर लेता हूँ |
छः 
मधुशाला के कुछ छंद या अंश 
मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला 
प्रियतम ,अपने ही हाथों से आज पिलाऊंगा प्याला 
पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पायेगा 
सबसे पहले तेरा स्वागत करती तेरी मधुशाला 

मदिरा पीने की अभिलाषा ही बन जाए जब हाला 
अधरों की आतुरता में ही जब अभासित हो प्याला 
बने ध्यान ही करते -करते जब साकी साकार सखे 
रहे न हाला ,प्याला साकी तुझे मिलेगी मधुशाला 

मुसलमान औ हिन्दू हैं दो एक मगर उनका प्याला 
एक मगर उनका मदिरालय एक मगर उनकी हाला 
दोनों रहते एक न जब तक मस्जिद -मंदिर में जाते 
बैर बढ़ाते मस्जिद -मंदिर ,मेल कराती मधुशाला 

कभी नहीं सुन पड़ता इसने हा 'छू दी मेरी हाला 
कभी न कोई कहता उसने जूठा कर डाला प्याला 
सभी जाति के लोग यहाँ पर साथ बैठकर पीते हैं 
सौ सुधारकों का करती है काम अकेली मधुशाला 

दो दिन ही मधु मुझे पिलाकर ऊब उठी साकीबाला 
भरकर अब खिसका देती है वह मेरे आगे प्याला 
नाज़ ,अदा अंदाजों से अब हाय पिलाना दूर हुआ 
अब तो कर देती है केवल फ़र्ज़ -अदाई मधुशाला 

मेरे अधरों पर हो अंतिम वस्तु न तुलसी -दल प्याला 
मेरी जिह्वा पर हो अंतिम वस्तु न गंगाजल हाला 
मेरे शव के पीछे चलनेवालो याद इसे रखना 
राम नाम है सत्य न कहना कहना सच्ची मधुशाला 
सात -
बच्चन जी के द्वारा प्रोफेसर राजेन्द्र कुमार को लिखा एक पत्र उनकी हस्तलिपि के रूप में [साभार प्रो० राजेन्द्र कुमार ]

17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर कवितायें.....
    सहेज कर रखने लायक पोस्ट है तुषार जी....
    आपका बहुत शुक्रिया.

    सादर
    अनु

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  2. सुन्दर परिचय ,सुन्दर कृति संकलन

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  3. अच्छा परिचय व सुंदर कविताएँ !
    साझा करने के लिए धन्यवाद !
    ~सादर!!!

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  4. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 03-12-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1082 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  5. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 03-12-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1082 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  6. उत्कृष्ट साहित्य का संकलन व् पठनिये रचना...

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  7. बच्चन जी को पढ़ना गुनना सदैव ही सुखद रहा है मधुशाला /मधुबाला दोनों सस्वर बरसों गाई हैं .

    निशा -निमंत्रण
    दिन जल्दी -जल्दी ढलता है

    हो जाय न पथ में रात कहीं
    मंजिल भी तो है दूर नहीं -
    यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी -जल्दी चलता है
    दिन जल्दी -जल्दी ढलता है

    बच्चे प्रत्याशा में होंगे
    नीड़ों से झांक रहे होंगे -
    यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है
    दिन जल्दी -जल्दी ढलता है

    मुझसे मिलने को कौन विकल
    मैं होऊं किसके हित चंचल
    यह प्रश्न शिथिल करता पद को ,भरता उर में विह्वलता है
    दिन जल्दी -जल्दी ढलता है

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  8. बच्चन जी की अत्यंत खूबसूरत कविताओं को यहाँ पढ़वाने के लिए आपका आभार उनको पढना सदा ही सुखद लगता है।

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  9. हरिवंश राय बच्च्न जी के बारे में प्रस्तुति अच्छी लगी। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

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  10. namaskar tushar ji

    bacchan ji ki yah parstuti bahut pasand aayi , inke bare me aur rachnao ko jitna padhe utna kam hi hai , badhai aapko

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  11. वाह आनंद आ गया ... मधुरता लिए ... आभार आपका ...

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  12. सादर आमंत्रण,
    आपका ब्लॉग 'हिंदी चिट्ठा संकलक' पर नहीं है,
    कृपया इसे शामिल कीजिए - http://goo.gl/7mRhq

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  13. अत्यंत सुन्दर रचनाओं का संकलन... बहुत-बहुत आभार

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  14. बहुत सार्थक पोस्ट ...
    आभार.....

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  15. इतना सुंदर ब्लाग अब तक नजर में कैसे नहीं आया?

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  16. कालजयी कवि बच्चन की रचनायें साझा करने के लिए धन्यवाद...

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