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सोमवार, 10 सितंबर 2012

पवन कुमार की कुछ चुनिन्दा ग़ज़लें

कवि /शायर -पवन कुमार [ I.A.S]
सम्पर्क -09412290079 e-mail-singhsdm@gmail.com
साहित्य में कुछ ऐसे प्रशासनिक अधिकारी होते हैं जिन्हें लोग सिर्फ़ और सिर्फ़ उनके ओहदे के नाते कवि या कहानीकार मान लेते हैं |लेकिन कुछ ऐसे भी प्रशासनिक ऑफिसर होते हैं जो अपने ओहदे के नाते नहीं बल्कि अपने लेखन से अपनी अलग पहचान बना लेते हैं |उनके भीतर का शायर उनके ओहदे पर भारी पड़ जाता है |पवन कुमार गज़ल की दुनिया में एक ऐसा ही सहज  नाम है, जिसने अपने पद और शायरी के बीच एक विभाजन रेखा खींच दिया है |कहन की सादगी भाषा के प्रति सजगता  और कथ्य शिल्प में नयापन इनकी गज़लों की विशेषता है | पवन कुमार की ग़ज़लें आम आदमी से सीधा संवाद करती हैं ,बिना किसी आवरण के बिना किसी लाग -लपेट के | कविता लिखना एक आदमी होने की कोशिश करना है और इस कोशिश में पवन जी शत -प्रतिशत कामयाब हुए हैं |प्रशासन के अनुभवों को भी यह शायर सरकारी सेवा में रहते हुए गज़ल का विषय बनाने में नहीं चूकता है |पवन कुमार पेशे से भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े हैं और वर्तमान में जिलाधिकारी चन्दौली [वाराणसी को विभाजित करके बनाया गया जिला ]के पद पर तैनात हैं |पवन कुमार का जन्म 08-08-1975 को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जनपद में हुआ था | पवन कुमार विज्ञान और कानून में सेंट जोन्स आगरा से स्नातक हैं |इनके पिता का नाम श्री डी० पी० सिंह माता का नाम श्रीमती शीला देवी और धर्मपत्नी का नाम श्रीमती अंजू सिंह है |अभी हाल में नई दिल्ली से इनका गज़ल संग्रह वाबस्ता [ग़ज़लें /नज़्में ]प्रकाशित हुआ है |प्रोफ़ेसर वसीम बरेलवी से इनकी काफ़ी निकटता है |यह निकटता व्यक्तिगत और शायराना दोनों ही स्तर पर है |अंतर्जाल पर भी नज़रिया नाम के ब्लॉग के माध्यम से पवन कुमार सक्रिय हैं |आप तक हम उनकी कुछ ग़ज़लें अन्तर्जाल के माध्यम से पंहुचा रहे हैं |

पवन कुमार और उनका काव्य संसार -कुछ ग़ज़लें 
एक 
जहां हमेशा समंदर ने मेहरबानी की 
उसी ज़मीन पे किल्लत है आज पानी की 

उदास रात की चौखट पे मुंतज़िर आँखें 
हमारे नाम मुहब्बत ने ये निशानी की 

तुम्हारे शहर में किस तरह जिंदगी गुज़रे 
यहाँ कमी है तबस्सुम की ,शादमानी की 

ये भूल जाऊं तुम्हें सोच भी नहीं सकता 
तुम्हारे साथ जुड़ी है कड़ी कहानी की 

उसे बताये बिना उम्र भर रहे उसके 
किसी ने ऐसे मुहब्बत की पासबानी की 

दो 
ज़रा सी चोट को महसूस करके टूट जाते हैं 
सलामत आईने रहते हैं चेहरे टूट जाते हैं 

पनपते हैं यहाँ रिश्ते हिजाबों एहतियातों में 
बहुत बेबाक होते हैं तो रिश्ते टूट जाते हैं 

दिखाते हैं नहीं जो मुद्दतों तिश्नालबी अपनी 
सुबू के सामने आकर वो प्यासे टूट जाते हैं 

किसी कमजोर की मज़बूत से चाहत यही देगी 
कि मौजें सिर्फ़ छूती हैं ,किनारे टूट जाते हैं 

यही इक आखिरी सच है जो हर रिश्ते पे चस्पा है 
जरूरत के समय अक्सर भरोसे टूट जाते हैं 

गुज़ारिश अब बुज़ुर्गों से यही करना मुनासिब है 
ज़ियादा हो जो उम्मीदें तो बच्चे टूट जाते हैं 

तीन 
कभी तो है कभी गोया नहीं है 
मगर ये सच है तू खोया नहीं है 

इन्हीं से अब सुकूं पाने की ज़िद में 
किसी भी दाग को धोया नहीं है 

तेरे हर नक्श को दिल से जिया है 
तुझे ऐ ज़िन्दगी ढोया नहीं है 

उगेगा खौफ़ ही आँखों में अब तो 
सिवा-ए -मौत कुछ बोया नहीं है 

मुझे भी ख़्वाब होना था उसी का 
मेरी किस्मत कि वो सोया नहीं है 

न जाने उसको कितने गम मिले हैं 
हुई मुद्दत कि वो रोया नहीं है 

चार 
मेरी तन्हाई क्यों अपनी नहीं है 
ये गुत्थी आज तक सुलझी नहीं है 

बहुत हल्के से तुम दीवार छूना 
नमी इसकी अभी उतरी नहीं है 

मुआफ़ी बख्स दी इस तंज़ के साथ 
'तुम्हारी भूल ये पहली नहीं है '

ये दिल है इसको बन्द आँखों से समझो 
कोई तहरीर या अर्ज़ी नहीं है 

बक़ारो -इज़्ज़तो -शोहरत की मंज़िल 
मुझे पाना है पर जल्दी नहीं है 

बहुत चाहा तेरे लहजे में बोलूँ 
मगर आवाज़ में नरमी नहीं है 

पांच 
मैं हूँ मुश्किल में, याद करते ही 
दोस्त बदले हैं दिन बदलते ही 

हर कदम पर थी किस कदर -फिसलन 
गिर गया मैं ज़रा सम्हलते ही 

फिर नया ज़ख्म दे गया ज़ालिम
 कुछ पुराने से घाव सिलते ही 

कोरों -कोरों में कांच चुभते हैं 
ख़्वाब टूटे हैं आँख खुलते ही 

है अजब सल्तनत भी सूरज की 
रात बिखरी है दिन संवरते ही 

पानियों का जुलुस देखा था 
सख्त चट्टान के दरकते ही 

वस्ल में वक़्त ऐसे कटता है 
शब गुज़र जाए पल झपकते ही 

छः 
चुनी है राह जो काँटों भरी है 
डरें क्यों हम तुम्हारी रहबरी है 

हर इक शय में तुझी को सोचता हूँ 
तेरे जलवों की सब जादूगरी है 

खुला रहता है दरवाज़ा सभी पर 
तुम्हारा दिल है या बारहदरी है 

दिखावा किस लिए फिर दोस्ती का 
अगर दिल में फक़त नफ़रत भरी है 

वही मसरूफ़ दिन बेकैफ़ लम्हे 
इसी का नाम शायद नौकरी है 

सुना है फिर नया सूरज उगेगा 
यही इक रात बस काँटों भरी है 

वो कहता है छुड़ाकर हाथ मुझसे 
तुम्हारी ज़ीस्त में क्यूँ अबतारी है 

भटकना भी नहीं बस में हमारे 
जिधर देखो तुम्हारी रहबरी है 

सात -पवन कुमार की हस्तलिपि में कुछ अशआर 


कवि /शायर पवन कुमार का खूबसूरत और चर्चित गज़ल संग्रह 
विशेष -[पवन कुमार के ग़ज़ल संग्रह वाबस्ता पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का जयशंकर प्रसाद सम्मान 10-03-2013 को दिया गया ]
सुनहरी कलम से -
पवन कुमार की ग़ज़लें पढ़कर यह कहा जा सकता है कि उन्होंने अपने अहसास को सलीके से अल्फ़ाज देने की कोशिश की है |उनका शेरीजौक समाई है |मकबूल शाइरों से मुतास्सिर हुए |मैं नहीं जानता कि पवन कुमार भीड़ से कितनी बात करते हैं |करते भी हैं कि नहीं ?लेकिन वे ;वाबस्ता ;के वसीले से फर्द से फ़र्दंन -फ़र्दंन बात करना चाहते हैं |मैं उनके इस इरादे का इस्तकबाल करता हूँ |
शीन काफ़ निज़ाम [पुस्तक के फ्लैप से ]
पवन कुमार एक खुशमिजाज़ इंसान ,जिम्मेदार सरकारी अफ़सर और मोहतात लाबोलहजे के शायर हैं |उनकी मनसबी मसरूफ़ियत ने अगर उन्हें आइन्दा भी गज़ल के साथ खुल खेलने का भरपूर मौका दिया तो वह यक़ीनन गज़ल की पेशानी पर अपना नाम लिखकर इसकी मुमलिकत को वसीअ से वसीअ तर करेंगे -
अकील नोमानी -[पुस्तक की भूमिका से ]

14 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन रचनायें, परिचय का आभार..

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  2. pawan kumar sahab eh behatareen insaan, ek mukammal shayar aur manje hue prashasnik adhikari hai'n, inki shkhsiyat ka sabse aham pahaloo inki zahanat aur positive attitude hai,hamesha inse kuchh n kuchh seekhne ko milta rehta hai,inki shyari ki bangi aap log dekh hi chuke hai'n uske bare mei'n kabhi tafseel se charcha karenge, abhi to sunahari kalam ko sadhuvad ek behatareen shakhsiyat se is group ko roo b roo karane ke liye

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  3. क्या खूब रचनाएं हैं.. बहुत ही अच्छा लगा पढ़ कर.. साझा करने के लिए धन्यवाद! :)

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  4. सुनहरी कलम में आज आपने एक और नगीना जड़ दिया -पवन कुमार की गज़लें शिल्प कथ्य और अभिव्यक्ति की एकल मिसाल हैं !

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  5. ज़रा सी चोट को महसूस करके टूट जाते हैं
    सलामत आईने रहते हैं चेहरे टूट जाते हैं ...

    पवन कुमार जी की ग़ज़लें नई ताजगी लिए हैं ... प्रखर और स्पष्ट बात कहने का लाजवाब अंदाज़ लिए हैं ...
    पवन जी से परिचय करना उनकी गज़लों के माध्यम से बहुत अच्छा लगा ...

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  6. आपका शुक्रगुजार हूँ तुषार साहब........

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  7. पवन जी से परिचय करना बहुत अच्छा लगा ... !!!

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  8. पवन कुमार जी ने 'वाबस्ता' की मार्फ़त अपने चाहने वालों को नायाब तोहफा दिया है
    आपकी ग़ज़लें व्यवस्था और व्यक्ति दोनों जगह उपस्थित विडंबनाओं पर चोट करती है और यह बात ही इनको अन्य ग़ज़लकारों से अलग करती है

    आज 'सुनहरी कलम से' मंच पर पवन जी को उपस्थित देखकर बेहद खुशी हुई

    तुषार जी सुन्दर प्रस्तुतीकरण के लिए बधाई स्वीकारें

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  9. श्री पवन जी की ग़ज़लें शानदार और उर्वर हैं | नयेपन और ताजगी से भरी हुई | महत्त्वपूर्ण है कि आज जबकि सरकारी सेवा में उच्च पदों पर पहुँच कर लोग ज़मीन से कट जाते हैं परन्तु श्री पवन जी साहित्य और सृजन से जुड़े हुए हैं और मजबूती से सक्रिय हैं | इस जिंदाबाद शायर कलमकार से हम सबको रूबरू कराने हेतु सुनहरी कलम को भी हार्दिक धन्यवाद !!

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  10. Galti Se Hindi LIPI Post Ho Gayi, Mazedaar Ghazalon Me Kaafi Damm Bhi Hai.

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