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सोमवार, 15 अगस्त 2011

छःकविताएं -कवयित्री वाजदा खान

कवयित्री -वाजदा खान 
mob.no.09868744499
e-mail-vazda.artist@gmail.com
वाजदा खान समकालीन हिंदी कविता की एक महत्वपूर्ण कवयित्री हैं | वाजदा खान का जन्म 15 जून 1969को ग्राम -बढ़नी ,सिद्धार्थनगर [उ० प्र० ]में हुआ था |यह  कवयित्री एक कुशल और लब्धप्रतिष्ठ चित्रकार /पेंटर भी है |वाजदा खान जिस तरह स्त्री मनोभावों को अपनी पेंटिंग्स में चित्रित करती हैं उसी तरह अपनी कविताओं में भी बड़े सलीके से उन्हें अभिव्यक्त करती हैं |नया ज्ञानोदय ,हंस ,वागर्थ ,बहुवचन ,साक्षात्कार ,साहित्य अमृत ,आजकल ,पाखी और देश की अन्य प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में इनकी कविताएँ प्रकाशित होती रहती हैं |वाजदा खान की कुछ कविताओं का कन्नड़ में अनुवाद भी हुआ है |देश के कई सम्मानित काव्य मंचों पर इनका काव्य पाठ भी हो चुका है |वाजदा खान की पेंटिंग्स की एकल और सामूहिक प्रदर्शनियां देश की विख्यात कलादीर्घाओं में आयोजित  हो चुकी हैं |देश की कई कार्यशालाओं में भाग ले चुकी वाजदा खान को भारत के संस्कृति मंत्रालय द्वारा वर्ष 2004-2005 में फेलोशिप भी दी प्रदान की गयी है | जिस तरह घुलती है काया भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित वाजदा खान का कविता संग्रह है जिसे हेमंत स्मृति सम्मान 2010 से सम्मानित किया जा चुका है |वाजदा खान ललित कला अकादमी नई दिल्ली [लाजपत नगर के पास ]बतौर स्वतंत्र कलाकार कार्यरत हैं |हम वाजदा खान की कुछ कविताएँ अंतर्जाल के माध्यम से पहुंचा रहे हैं |
एक 
वाजदा खान की हस्तलिपि में एक कविता 
दो 
मैं अनंत ,तुम आकाश 
हम अनंत आकाश हो गए 
धरती से दूर कहीं ,जहाँ सपने पलते हैं ,
कोई मेरी आँखों में तमाम 
पारदर्शी महीन रेखाओं का 
बहुवर्णीय संजाल बीनता रहा 
मेरे इर्द -गिर्द मंडराता रहा 
क्या जरूरत थी सपने की तरह तुम्हें मेरी 
देह /रक्त /मज्जा में पलने की 
कितना अमूर्तन था तुम्हारे चेहरे की 
रेखाओं में ,
पहचान न सकी ,अपने भीतर की स्थूलता के 
कारण ,अमूर्तन में ढलने की 
लम्बी साधना की दरकार है 
शायद तब तुम कोई आकार 
ले पाओ सपने |
तीन 
चिड़िया तुम अपने पंख 
उधार दे दो 
मुझे चाँद से मिलने जाना है 
हवा न जाने कहाँ उसे 
बुहार कर ले गई 
चिड़िया !मुझ पर विश्वास करो 
तुम्हारे पंख लौटा दूंगी 
बस एक मुलाकात करना चाहती हूँ ,
उसके लिए मुझे जाना ही होगा 
तुम मेरे लिए इतना तो कर सकती हो ना !
मैं तुम्हें प्यार जो करती हूँ इतना 
थोड़ा प्यार चाँद के पंखों में 
भरना चाहती हूँ ताकि 
आसमान की बंदिश के आलावा 
कोई मनचाही उड़ान भर सके |
चार 
मैं अध्यात्म के समंदर में 
गोता लगाता हूँ तो कुछ अमूर्त प्रेम 
के मोती निकालकर लाता हूँ 
बहुत सारे मोती मेरे पास 
इकट्ठा हैं |
सोचता हूँ पिरो लूँ उन्हें 
उम्मीद के किसी धागे में 
कभी तो डाल पाउँगा तुम्हारे गले में 
उसका प्रभाव -
बहुत सारे सितारे उगा देगा तुम्हारे भीतर ,
जीवन के माथे पर धर देगा दीप 
जिसकी रोशनी होगी 
तुम्हारे चारो ओर 
प्रभावित होंगीं सदियों की सदियाँ |
पांच 
तुम्हें तिनका -तिनका बीनकर 
घोंसला बनाने का पूरा इरादा था 
बया का 
क्या हुआ ?जो तुम धूलिकण से 
बिखरे थे यहाँ -वहां 
थोड़ा सा विश्वास ओढ़ लेते आँखों पर 
गांधारी वाली पट्टी खोलकर 
थोड़ा सा कर्ण से कृष्ण बन जाते 
देख पाते विराट संसार की माया 
जो राह भूले पथिक सा भटका देती है 
तुम्हें ,किस मार्ग पर उठाकर पांव धरने हैं 
यह समझ पाते 
मैंने कहा भी था ,लाओ मैं खोल दूँ 
तुम्हारी गांधारी पट्टी 
तुम बिफर गए थे फटते ज्वालामुखी सा 
कितना गर्द -गुबार उठा था 
छा गया था अँधेरा हृदय पर 
जम गई थी धुंए की परत दर परत 
लिपट गई देह से 
न जाने कितनी बेचैन हवाएं 
सिर्फ एक क्षण को 
हटा लेते पट्टी आँखों से 
देख पाते कौरवों की क्षुद्र सेना 
दस दिशाओं तक 
फैले साम्राज्य की रानी का अपमान 
छः 
परे ढकेलना क्या होता है ?
कोई तुमसे सीखे 
कई पिरामिडों पर पांव रखते हुए 
अपना पिरामिड सुरक्षित तुम तक लाई थी 
ढहा दिया तुमने उसे 
ताश के पत्तों की तरह 
चलो दूर देश कहीं 
याद करोगे कभी 
तो पाओगे 
तमाम दुश्वारियों की छवियाँ कैद थीं 
तुम्हारी आँखों में ,जिनकी जड़ें 
बहुत गहरी थीं |
वाजदा खान की कुछ पेंटिंग्स 
[सभी पेंटिंग्स कवयित्री /चित्रकार वाजदा खान की हैं ]

31 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर , खूबसूरत प्रस्तुति .
    स्वतन्त्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ
    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें

    उत्तर देंहटाएं
  2. स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और ढेर सारी बधाईयां

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  3. अद्भुत साहित्यमना से परिचय का आभार।

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  4. kvitaaen jyada sunder hai ya painting yhi duvidha hai
    sunder srizan ke lie bdhaai

    HAPPY INDEPENDENCE DAY

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  5. वाह आप बहुत अच्छा लिखते हैं
    साथ ही साथ पेंटिंग वाह बहुत बहुत अच्छी हैं.....
    में तो आपका फेन हो गया...

    उत्तर देंहटाएं
  6. शुक्रिया जयकृष्ण राय तुषार जी ऐसी प्रतिभा से मिलवाने के लिए...

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  7. वाजदा खान के खूबसूरत काव्य संसार और अदभुत चित्रकला से परिचय कराने के लिए आभार.. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...
    सादर,
    डोरोथी.

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  8. जयकृष्ण जी बहुत सुन्दर कवितायेँ और वाजदा खान जी की पेंटिंग्स खुबसूरत अच्छा कलेक्शन आप का -धन्यवाद
    स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभ कामनाएं
    भ्रमर ५
    मैंने कहा भी था ,लाओ मैं खोल दूँ
    तुम्हारी गांधारी पट्टी
    तुम बिफर गए थे फटते ज्वालामुखी सा
    कितना गर्द -गुबार उठा था
    छा गया था अँधेरा हृदय पर
    जम गई थी धुंए की परत दर परत
    लिपट गई देह से

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत बढ़िया कविताएँ हैं!
    --
    स्वतन्त्रता दिवस के पावन अवसर पर बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. तुषार जी, वाजदा खान की रचनाओं और पेंटिंग्स से मुखातिब करने के लिए शुक्रिया...

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  11. ऐसी हस्ती को खड़े होकर सलाम और आपका आभार ......

    उत्तर देंहटाएं
  12. खूबसूरत प्रस्तुति .
    आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

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  13. वाजदा खान जी के गंभीर लेखन से परिचित करने के लिए जय कृष्ण राय जी आपका बहुत बहुत आभार

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  14. वजदा खान की कवितायें संवेदना से भरी हैं ! इन जीती हुई कविताओं को पढ़कर स्वयं के जीवित होने का अहसास होता है !
    भाई तुषार जी , हमें उत्कृष्ट साहित्य सहजता से उपलब्ध कराने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

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  15. अकेला जिया ...तो क्या जिया
    ख्यालों के काटों में ....
    मानों कोई ...सूरज मुखी का तड़पना //

    कभी मेरे ब्लॉग पर भी आये ...निमंत्रण हैं

    उत्तर देंहटाएं
  16. जयकृष्ण जी बहुत सुन्दर कवितायेँ ....खूबसूरत प्रस्तुति

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  17. well first of all a big thanks for stopping by my blog n commenting. I really appreciate that.

    and the post was a treat to readers.
    loved it.

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  18. सभी कवितायें सुन्दर और पेंटिंग... वाह!!
    सादर बधाई...

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  19. वाकई, वाजदा खान जी को कूची और कलम दोनों में महारत हासिल हे. परिचित कराने के लिए आभार.

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  20. आपकी पोस्ट आज चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई ,
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

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  21. खूबसूरत कला और वाजदा जी का परिचय कराने के लिए आपका आभार !...

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  22. थोड़ा प्यार चाँद के पंखों में
    भरना चाहती हूँ ताकि
    आसमान की बंदिश के आलावा
    कोई मनचाही उड़ान भर सके |...
    गंभीर लेखन और इतनी सुन्दर पेंटिंग्स से परिचय करवाने के लिए आभार

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  23. हम अनंत आकाश हो गए
    वाजदा जी का परिचय कराने के लिए आपका आभार

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  24. बहुत सुन्दर.. वाजदा जी का परिचय कराने के लिए आपका आभार

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  25. गहरी अनुभूतियों की अभिव्यक्ति कलम और तूलिका के जरिये

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  27. उम्दा रचनाएं ,लाजवाब पेंटिंग्स बहुत खूब।

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