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बुधवार, 18 मई 2011

छः गज़लें -कवि हस्तीमल हस्ती

कवि -हस्तीमल हस्ती 
सम्पर्क -09820590040
जिसने तपती हुई रेत में प्यास से व्याकुल हिरणों को दौड़ते -भागते देखा हो ,जिसने समन्दर की लहरों को उसी में भींगते हुए गिना हो ,जिसने ऊँट पर सवारी कर मृगमरीचिका को देखा हो ,जो लोक संस्कृति की गोंद में पला -बढा हो ,जिसने महानगरीय संस्कृति के इन्द्रधनुषी रंगों को आत्मसात किया हो ,जो उस शहर में कविता की मशाल जलाये हो जहाँ नियान की चमकती रोशनियों में दिन और रात का फर्क ही खत्म हो जाता है |जिसने प्यार को एक नई परिभाषा देकर लिखा हो -प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है ,उस नामचीन शायर /कवि का नाम है हस्तीमल  हस्ती | हस्तीमल हस्ती का जन्म 11मार्च  1946 को आमेट, जिला राजसमन्द राजस्थान में हुआ ,लेकिन इनका कर्म  स्थान है मुंबई | हस्तीमल हस्ती की शायरी में बारूद के धमाकों का शोरगुल तो नहीं है लेकिन उनकी शायरी माचिस की उस तीली की तरह है जो हजारों चिरागों को रोशन कर सकती है |इनकी गज़लों में रिश्तों की महक ,सामाजिक सन्दर्भों का स्वर ,विचारों की खुशबू और एक अच्छी शायरी का हुनर मौजूद है |सम्प्रेषणीयता इनकी गज़लों की एक अद्भुत विशेषता है |साहित्य को समर्पित इस शायर ने जिन्दगी में तमाम उतार -चढ़ाव देखे हैं लेकिन हालत से डरे बिना अपने काम को अंजाम देते रहे |हिन्दी साहित्य में युगीन काव्या के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है |अभी हाल में इसका पचासवां अंक प्रेम विशेषांक के रूप में हमारे बीच मौजूद है |हस्तीमल हस्ती जितने अच्छे शायर हैं उतने अच्छे सम्पादक और उतने ही अच्छे इंसान हैं |सुदर्शन फाकिर जैसे ख्यातिलब्ध शायर से इनका गहरा रिश्ता था | हस्तीमल हस्ती का शोध ग्रंथों में उल्लेख है ,कई गज़ल संग्रहों में गज़लें संग्रहीत हैं ,तमाम नामचीन पत्र -पत्रिकाओं में इनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं |मशहूर गज़ल गायक जगजीत सिंह और पंकज उधास ने इनकी गज़लों को अपना रेशमी सुर दिया है |इस शायर के दो गज़ल संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं- 1-क्या कहें किससे कहें [महाराष्ट्र हिन्दी साहित्य अकादमी से पुरष्कृत 2-कुछ और तरह से भी [अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरष्कार से सम्मानित ]दूरदर्शन और आकाशवाणी से इनकी कविताओं का प्रसारण होता रहता है |हम हिन्दी गज़ल को समर्पित इस शायर /कवि की कुछ गज़लें आप तक पहुँचा रहे हैं |आपसे इस पोस्ट के साथ ही कुछ दिन के लिये विदा ले रहे हैं -
हस्तीमल हस्ती की गज़लें 
एक 
प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है 
नये परिंदों को उड़ने में वक्त तो लगता है 

जिस्म की बात नहीं थी उनके दिल तक जाना था 
लम्बी दूरी तय करने में वक्त तो लगता है 

गाँठ अगर लग जाये तो फिर रिश्ते हों या डोरी 
लाख करें कोशिश खुलने में वक्त तो लगता है 

हमने इलाजे जख्में दिल का ढूंढ लिया लेकिन 
गहरे जख्मों को भरने में वक्त तो लगता है
[इस गज़ल को महान गज़ल गायक जगजीत सिंह जी ने अपना सुर दिया है ]
दो  

खुशनुमाई देखना ना क़द किसी का देखना 
बात पेड़ों की कभी आये तो साया देखना 

खूबियाँ पीतल में भी ले आती हैं कारीगरी 
जौहरी की आँख से हर एक गहना देखना 

झूठ के बाज़ार में ऐसा नजर आता है सच 
पत्थरों के बाद जैसे कोई शीशा देखना 

जिंदगानी इस तरह है आजकल तेरे बगैर 
फासले से जैसे कोई मेला तनहा देखना 

देखना आसां है दुनियाँ का तमाशा साहबान 
है बहुत मुश्किल मगर अपना तमाशा देखना 
तीन 
सबकी सुनना ,अपनी करना 
प्रेम नगर से जब भी गुजरना 

अनगिन बूंदों में कुछ को ही 
आता है फूलों पे ठहरना 

बरसों याद रक्खें ये मौजें 
दरिया से यूँ पार उतरना 

फूलों का अंदाज सिमटना 
खुशबू का अंदाज बिखरना 

अपनी मंज़िल ध्यान में रखकर 
दुनियाँ की राहों से गुजरना 
चार 
झील का बस एक कतरा ले गया 
क्या हुआ जो चैन दिल का ले गया 

मुझसे जल्दी हारकर मेरा हरीफ़ 
जीतने का लुत्फ़ सारा ले गया 

एक उड़ती सी नज़र डाली थी बस 
वो न जाने मुझसे क्या -क्या ले गया 

देखते ही रह गये तूफान सब 
खुशबुओं का लुत्फ़ झोंका ले गया 
पांच 
चिराग हो के न हो दिल जला के रखते हैं 
हम आंधियों में भी तेवर बला के रखते हैं 

मिला दिया है पसीना भले ही मिट्टी में 
हम अपनी आँख का पानी बचा के रखते हैं 

हमें पसंद नहीं जंग में भी मक्कारी 
जिसे निशाने पे रक्खें बता के रखते हैं 

कहीं खुलूस कहीं दोस्ती कहीं पे वफ़ा 
बड़े करीने से घर को सजा के रखते हैं 

अना पसंद है हस्ती जी सच सही लेकिन 
नज़र को अपनी हमेशा झुका के रखते हैं 
छह -हस्तीमल हस्ती की हस्तलिपि में एक गज़ल 
सुनहरी कलम से -
हस्तीमल हस्ती गज़ल के बहुत सशक्त हस्ताक्षर हैं |वह बहुत अच्छा लिख रहे हैं |युगीन काव्या को मैं पढता रहता हूँ |हस्ती जी ने गज़ल के लिये काम भी बहुत किया है |मुंबई में कई बार उनसे मिला भी हूँ वह एक अच्छे शायर और एक अच्छे इंसान भी हैं |हस्तीमल हस्ती अपने क्षेत्र की एक हस्ती हैं -
अदम गोंडवी [सुप्रसिद्ध गज़ल कवि ]

हस्तीमल हस्ती न केवल एक बेहतरीन शायर हैं बल्कि एक कुशल सम्पादक भी हैं |व्यावसायिक परिवार से ताल्लुकात रखने के बावजूद भी इन्होंने लेखन कर्म को प्राथमिकता दिया |इनके कहन में उत्तरोत्तर निखार आया है |इन्होंने प्रारम्भ में एक पत्रिका युगीन काव्या का सम्पादन शुरू किया जो आज भी सफलतापूर्वक प्रकाशित हो रही है |
विज्ञान व्रत [सुप्रसिद्ध गजलकार और पेंटर दिल्ली ]

हस्तीमल हस्ती की समूची शख्सियत ही गज़ल जैसी है |वह हिन्दी गज़ल या उर्दू गज़ल के पचड़े में न पड़कर उस ज़बान में गज़लें कहते हैं ,जिसे आम हिन्दुस्तानी बोलता है ,इस तरह से कह सकते हैं कि उन्होंने हिन्दुस्तानी गज़ल का चेहरा ही और अधिक स्पष्ट एवं रौशन किया है |जगजीत सिंह की रेशमी आवाज में जब ;प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है जैसी गज़ल मंजरे आम पर आयी तब तो जैसे गज़ल विधा को ही एक नया मुहावरा मिल गया |उनकी कहन में सादगी का हुस्न है ,उनके शील में उस्तादाना रंग है |कविता की स्तरीय पत्रिका ;युगीन काव्या के पचास अंक अपने सम्पादन में निकालकर भी उन्होंने एक ऐतिहासिक कार्य किया है |अपने ढंग की निराली और यह पत्रिका विशेषकर छंद को समर्पित रही है ,साथ ही इसने सम्वेदनशील मुक्त छंद कविता का भी सम्मान किया है |हस्ती को पढ़ना ,गुनना एवं सुनना हर बार एक नया आस्वाद दे जाता है |
सुप्रसिद्ध गीत कवि यश मालवीय 
हस्तीमल हस्ती सघन अनुभूतियों के सहृदय व् सरल रचनाकार एवं सम्पादक हैं |गज़ल के लिये हिन्दी में सृजनात्मक स्तर पर कार्य करनेवालों में उनका महत्वपूर्ण स्थान है |युगीन काव्या के माध्यम से उन्होंने हिन्दी गज़ल ही नहीं काव्य की अन्य विधाओं के भी उत्थान एवं प्रचार -प्रसार की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है |पत्रिका का पचासवां अंक प्रेम विशेषांक के रूप में  एक अनुपम प्रस्तुति है |
कमलेश भट्ट कमल सुप्रसिद्ध हिन्दी गज़ल कवि 

17 टिप्‍पणियां:

  1. तुषार जी आज पहली बार इस ब्लाग पर आया हूं। बहुत अच्छा लगा, अभी तो एक सरसरी तौर पर ब्लाग ही देखा हू, लेकिन वाकई यहां मुझे बहुत अच्छा लगेगा। अद्भुत संकलन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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  2. गाँठ अगर लग जाये तो फिर रिश्ते हों या डोरी
    लाख करें कोशिश खुलने में वक्त तो लगता है
    bahut sundar lagi ye panktiyan,hastimal hasti ji se parichay karane ke liye jai krishn ji sadar dhanyawad.

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  3. भाई महेंद्र श्रीवास्तव जी और आदरणीया शालिनी जी आप सभी का बहुत बहुत आभार |

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  4. गजल का हर शेर उम्दा है !
    सबसे बढ़िया लगा पहले गजल कि यह पंक्ति
    हमने इलाजे जख्मे दिल का ढूंड लिया लेकिन
    गहरे जख्मों को भरने में वक्त तो लगता है !
    बधाई हस्तीमल हस्ती जी को !
    और तुषार जी आपको भी !

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  5. जयकृष्ण राय तुषार जी नमस्ते ! व्यस्तता के कारण देर से आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ.
    अपने शहर के प्रख्यात गीतकार श्री यश मालवीय जी को भी नमस्ते!
    गजल का हर शेर उम्दा है ! तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

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  6. हस्ती जी की ग़ज़ल पढना अपने आप में सम्पूर्ण है.....
    "गाँठ अगर पड़ जाये तो फिर रिश्ते हों या डोरी".... एक ऐसा सच जो हस्ती जी जैसी हस्ती ही कर सकती है. इतनी जानदार प्रस्तुति के लिए मेरे पास शब्द नहीं.धन्यवाद !!!

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  7. हस्ती जी की सुन्दर ग़ज़लें पढवाने और उनके बारे में जानकारी के लिए आभार

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  8. गाँठ अगर लग जाये तो फिर रिश्ते हों या डोरी
    लाख करें कोशिश खुलने में वक्त तो लगता है..

    Beautiful collection !

    .

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  9. jagjeet jiकी गाई गजल बार बार सुनी और यहाँ हस्ती जी की एनी गजलें पढ़ने को मिली ..आभार

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  10. यूं तो पढ़ना रहा है हस्ति मल जी को...आज आपकी कलम से परिचय और गज़ले पढ़ना सुखद रहा, आभार.

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  11. bahut shandar ghazalei'n hai'n, tushar sahab apko dhanyawad aur hasti mal hasti sahab ko mubarakbad itne khoobsoorat kalam ke liye

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  12. ग़ज़ब हैं हस्ती भाई। सलाम आपजी रचनात्मकता को।

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