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शनिवार, 14 मई 2011

चार नवगीत -कवि कुमार रवीन्द्र


कवि -कुमार रवीन्द्र
सम्पर्क -09416993264
नबाबों के शहर लखनऊ में जन्म ,शिक्षा अंग्रेजी में अध्यापन अंग्रेजी में लेकिन मन ,वचन और कर्म से हिन्दी गीत और साहित्य को समर्पित कवि का नाम है कुमार रवीन्द्र |हमारे देश में  कई ऐसे शिखर पुरुष हुए हैं जिन्होंने शिक्षा और पठन -पाठन के लिए तो अंग्रेजी साहित्य को चुना लेकिन आजीवन हिन्दी भाषा और साहित्य को समृद्ध किया ,फ़िराक गोरखपुरी ,हरिवंशराय बच्चन ,रमेशचन्द्र शाह ,और कुमार रवीन्द्र जी इसी श्रेणी के अलबेले और अप्रतिम कवि हैं |कुमार रवीन्द्र जी ने नवगीत में अभिनव प्रयोग किये हैं |कथ्य शिल्प ,संवेदना सहित तमाम साहित्यिक विशिष्टियों को समेटे यह उदारमना कवि आज भी हिन्दी नवगीत और साहित्य को समृद्ध कर रहा है |कुमार रवीन्द्र जी का जन्म 10 जून 1940 को लखनऊ में हुआ था |सन 1958 में इन्होंने लखनऊ विश्व विद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल किया |सन 2000में दयानंद कालेज हिसार हरियाणा से अंग्रेजी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हो गये |कृतियाँ -आहत हैं वन ,चेहरों के अंतरीप ,पंख बिखरे रेत पर ,सुनो तथागत ,और हमने संधियाँ की[ नवगीत संग्रह] लौटा दो पगडंडियाँ कविता संग्रह |एक और कौन्तेय ,गाथा आहत संकल्पों की ,अंगुलीमाल ,कटे अंगूठे का पर्व ,कहियत भिन्न न भिन्न  काव्य नाटक | THE SAT IS STILL GREENअंग्रेजी कविताओं का संग्रह है जो प्रतिष्ठित राइटर्स वर्कशाप से प्रकाशित |इसके आलावा नवगीत दशक भाग दो और नवगीत अर्धशती समेत अनेक समवेत संकलनों में कविताएं प्रकाशित |कुमार रवीन्द्र जी के गीत कानपुर और हरियाणा के विश्वविद्यालयों में एम० ए० के पाठ्यक्रम में शामिल |उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान हरियाणा साहित्य अकादमी और अन्य पुरष्कारों द्वारा पुरष्कृत इस कवि की कविताएं /गीत देश की प्रतिष्ठित पत्र -पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं |सादा जीवन उच्च विचार के दर्शन में आस्था रखने वाले कुमार रवीन्द्र जी के पांच गीत हम आप तक पहुंचा रहे हैं -
एक 

आग की पगडंडियों पर 
मोम के जंगल 
क्या करेंगे जल ?

जल रही बारूदघर में 
लाख की 
मीनार ,
सुर्ख लावे की सुरंगें 
किस तरह हो 
पार ?
गर्म आवों के शहर में है 
है बड़ी हलचल 
क्या करेंगे जल ?

ताल प्यासे पूछते हैं 
गाँव भर की 
खैर ,
दूर लपटों में 
झुलसकर 
लौट आये पैर ,
राख होना है सभी को 
आज हों या कल ,
क्या करेंगे जल ?
दो 
चोंच खोल 
दिन को गुहराते 
चिड़ियों के बच्चे |

तिनके -तिनके जोड़ 
बना है नीड़ 
उजाले का ,
सोये घर की 
नींद तोड़ता 
शंख शिवाले का ,
नन्हें पांव 
उभर आये हैं 
आंगन में कच्चे |

तुलसी चौरे पर 
बरगद की 
लम्बी छाँव पड़ी ,
फगुनाहट 
पिछली मुंडेर पर 
ओढ़े धूप खड़ी ,
भोली चितवन के 
दुलार सब 
हैं कितने सच्चे |
तीन 
सजनी देखो 
लौट आये हैं 
चिड़ियों के बतियाने के दिन |

आम्रकुंज से सुबह -सुबह 
कोयल ने टेरा ,
तोता आसमान का देखो 
लगा रहा फेरा ,
छत पर बैठा 
कौवा कहता 
हुए किसी के आने के दिन |

गौरैया के जोड़े ने फिर 
चहचह से घर को भर डाला ,
पिडुकी बुला रही पिडुके को 
जहाँ धूप का फैला जाला ,
जन्म हो रहा 
नये सूर्य का 
ये है सोहर गाने के दिन |

उधर टिटहरी रोई 
फिर कविता है जागी ,
लगन सगुन पंछी होने की 
मन में लागी ,
हाँ सजनी 
ये मन को है 
वंशीवट से उलझाने के दिन |
चार -कुमार रवीन्द्र की हस्तलिपि में एक गीत 
सुनहरी कलम से 
विगत दो दशकों में नवगीत साहित्य -चिंता केन्द्र में सर्वाधिक चर्चित विधा रही है और कुमार रवीन्द्र उस विधा के अत्यन्त महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रहे हैं |नये गीत में अनुभूति और संवेदना के जो नये से नये आयाम उद्घाटित हुए हैं उन पर कुमार रवीन्द्र की कल्पना की दस्तकें बखूबी सुनी जा सकती हैं |जैसे चित्रमय बिम्बों की आद्योपांत एक तानता उनके गीतों में लक्षित है ,वैसी मुझे समकालीन नवगीतकारों में दुर्लभ प्रतीत होती है |
देवेन्द्र शर्मा इंद्र [वरिष्ठ हिन्दी गीत कवि ] नवगीत संग्रह पंख बिखरे रेत पर [1992] के फ्लैप से 
कुमार रवीन्द्र हिन्दी नवगीत की दूसरी पीढ़ी के अत्यन्त महत्वपूर्ण रचनाकार हैं |बिम्बधर्मिता उनकी रचनाओं की एक अद्भुत विशेषता है |अंग्रेजी साहित्य के गहन अध्येता होने के कारण उन्होंने आपने गीतों में कथ्य और शिल्प के ऐसे प्रयोग किये हैं जो उन्हें आपने समकालीनों से अलग करते हैं |उनकी भाषा में एक ऐसी सहज पारदर्शिता है जो सम्प्रेषणीयता को सहज बनाती है |कहीं -कहीं उनमें कबीर की सामाजिक चेतना भी झलकती है |
माहेश्वर तिवारी [वरिष्ठ हिन्दी गीत कवि ]
कुमार रवीन्द्र नवगीत के प्रमुख कवियों में हैं |जो पिछले पांच दशक से अधिक समय से गीत लेखन कर रहे हैं |अपनी इस गीत यात्रा में उन्होंने अपने काव्य विवेक और गीत चेतना को निरंतर विकसित किया है इनके पूर्ववर्ती गीत मूलतः बिम्बधर्मी हुआ करते थे ,किन्तु कुमार जी ने शायद यह महसूस किया कि बिम्बधर्मी गीतों की एक सीमा होती है और फिर इन्होंने उस सीमा का बखूबी अतिक्रमण किया |इनके परवर्ती गीतों में इनकी राग दीप्त चेतना और जीवन से समय से गहरा लगाव देखने को मिलता है | 
सत्यनारायण [वरिष्ठ हिन्दी गीत कवि ]
हिन्दी नवगीत की भाषिक संरचना ,जातीय अस्मिता एवंम सम्वेदनात्मक तरलता के संदर्भ में कुमार रवीन्द्र के गीत अपनी अलग पहचान रखते हैं |उनका साधु -सरल व्यक्तित्व 'साधों 'की अभिव्यंजना में उनके अनेक गीतों में बोलता है ,जहाँ वह समाज के साथ -साथ स्वयं को भी सम्बोधित कर रहे होते हैं |निश्चित ही उनके नवगीतों ने इस विधा -विशेष को नयी भंगिमाएं एवं नया कथ्य -शिल्प देकर हिन्दी गीत के आसमान को कुछ और अधिक विस्तृत किया है |
 यश मालवीय  [सुप्रसिद्ध गीत कवि ]
[यह पोस्ट ब्लागर की त्रुटि से गायब हो गयी और पुनह वापस नहीं हुई ,इसमें आपके बहुमूल्य कमेंट्स भी गायब हो गये इसका हमें दुःख है |हम इस पोस्ट को दुबारा प्रकाशित कर रहे हैं |आपके सहयोग की अपेक्षा के साथ ]

4 टिप्‍पणियां:

  1. रवीन्द्र जी को जानना और पढ़ना सुखद लगा .उनके कविता में अभिनव प्रयोग कमाल का दिखा ..आपका आभार ..

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  2. जय कृष्ण राय तुषार जी यह पोस्ट तो आप पहले प्रकाशित कर चुके है | इसका कारण आग की पगडंडियों पर , मोम की जंगल, क्या करेंगे जल आज तक मुझे कंठस्थ है |चलिए अच्छा खाना अच्छा देखना जितनी बार हो जय अच्छा है

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  3. भाई सुनील जी आपने सही कहा लेकिन पोस्ट के नीचे मेरी टिप्पड़ी या नोट आप नहीं पढ़ पाये ब्लागर की त्रुटि से मेरी पोस्ट ही गायब हो गयी तो मुझे दुबारा पोस्ट प्रकाशित करना पड़ा |

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  4. bahut dhanyvaad charon navgeet pasand aaye

    1, 2 khaas pasand aaya

    hindi men n likh pane ke liye kshama karen.

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