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बुधवार, 30 मार्च 2011

पांच गज़लें -कवि -विज्ञान व्रत

कवि -विज्ञान व्रत
जन्म- 17/08/1943
सम्पर्क . e-mail-vigyanvrat@yahoo.com

मेरठ की जमीन जहां क्रांति के लिए विख्यात है वहीं कला और कविता से भी इसके गहरे सरोकार रहे हैं |वैसे तो दुनियां के इस  रंगमंच पर प्रत्येक व्यक्ति अपना रोल बखूबी  निभाता है ,लेकिन कुछ अभिनेता ऐसे होते हैं जो एक साथ कई रोल निभा ले जाते हैं |ऐसे ही एक नामचीन हिन्दी कवि और कलाकार का नाम है विज्ञान व्रत |विज्ञान व्रत  कवि बड़े हैं या  कलाकार यह तय कर पाना कम से कम मेरे लिए असम्भव नहीं तो मुश्किल अवश्य है |विज्ञान व्रत में कला और कविता दोनों के संस्कार बचपन से ही मिले हैं  |देश -विदेश की  विख्यात कला दीर्घाओं में इनकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनियां लग चुकी हैं ,तो देश की  प्रतिष्ठित पत्र -पत्रिकाओं में इनकी गज़लें प्रकाशित होती रहतीं हैं |इस कवि का जन्म 17जुलाई 1943 को मेरठ के टेरा गांव में हुआ था |दुष्यन्त के बाद हिन्दी गज़ल में जो  महत्वपूर्ण नाम उभर कर आये उनमे विज्ञान व्रत का नाम बड़े  आदर से लिया जाता है |छोटी बहर में लिखने वाले विज्ञान व्रत एक अनूठे रचनाकार /गजलकार हैं | विज्ञान व्रत मूलतः गज़ल विधा के कवि /शायर हैं लेकिन गीत और दोहा विधा भी इनकी कलम के लिए अछूते नहीं रहे हैं | विज्ञान व्रत मंच पर जब कविता पाठ करते हैं तो वहाँ भी अपने हुनर की  मिशाल  पेश करते हैं और श्रोताओं का दिल जीत लेते हैं | जगजीत सिंह जैसे नामचीन गायक ने विज्ञान व्रत की  गज़लों को अपना रेशमी स्वर दिया है |दिल्ली में कला को समर्पित एक स्टूडियो भी है | 1966 में आगरा विश्व विद्यालय से फाईन आर्ट्स में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने वाले विज्ञान व्रत तमाम पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किये जा चुके हैं | विज्ञान व्रत का पूरा परिचय यहाँ दे पाना सम्भव नहीं है | कृतियाँ -बाहर धूप खड़ी है ,चुप कि आवाज ,जैसे कोई लूटेगा ,तब तक हूँ ,महत्वपूर्ण गज़ल संग्रह हैं खिड़की भर आकाश इनके दोहों का संकलन है | हम विज्ञान व्रत जी की  पांच गज़लें और कुछ पेंटिग्स आप के साथ साझा कर रहे हैं |
एक 

मुझको जब ऊँचाई दे 
मुझको जमीं दिखाई दे 

एक सदा ऐसी भी हो 
मुझको साफ सुनाई दे 

दूर रहूँ मैं खुद से भी 
मुझको वो तनहाई दे 

एक खुदी भी मुझमें हो 
मुझको अगर खुदाई दे 

दो 
खुद से आंख मिलाता है 
फिर बेहद शरमाता है 

कितना कुछ उलझाता है 
जब खुद को सुलझाता है 

खुद को लिखते लिखते वो 
कितनी बार मिटाता है 

वो अपनी मुस्कानों में 
कोई दर्द छुपाता है 

तीन 
सुन लो जो सय्याद करेगा 
वो मुझको आजाद करेगा 

आँखों ने ही कह डाला है 
तू जो कुछ इरशाद करेगा 

एक जमाना भूला मुझको 
एक जमाना याद करेगा 

काम अभी कुछ ऐसे भी हैं 
जो तू अपने बाद करेगा 

तुझको बिलकुल भूल गया हूँ 
जा तू भी क्या याद करेगा 

चार 
सारा ध्यान खजाने पर है 
उसका तीर निशाने पर है 

अब इस घर के बंटवारे में 
झगड़ा बस तहखाने पर है 

होरी सोच रहा हा उसका 
नाम यहाँ किस दाने पर है 

सबकी नजरों में हूँ जब से 
मेरी आँख जमाने पर है 

कांप रहा है आज शिकारी 
ऐसा कौन निशाने पर है 
पांच -विज्ञान व्रत कि हस्तलिपि में एक गज़ल 






विज्ञान व्रत की पेंटिग्स और स्केच 

विज्ञान व्रत की पेंटिग 
विज्ञान व्रत का स्केच 
सुनहरी कलम से

1-विज्ञान व्रत हिन्दी के उन गज़लकारों में से हैं, जो छान्दसिक अनुशासन और भाषा सौष्ठव से च्युत गज़ल को गज़ल मानने से इनकार करते हैं |गज़ल के प्रति उनका यह रवैया गज़ल लेखन के उनके के उनके प्रारम्भिक दौर से रहा है और इसलिए वे शुरू से ही एक उल्लेखनीय गजलकार के रूप में पहचाने जाते रहे हैं |छोटी बहरों में गज़ल कहना अपेक्षाकृत दुष्कर है ,लेकिन विज्ञान व्रत को छोटी बहरें ही रास आती हैं |सीधी -सादी आम फहम शब्दावली में अपनी बात कहने के बावजूद वे अपने अशआर सपाटबयानी के इल्जाम से बचा ले जाते हैं |यही उनकी खास पहचान है | विज्ञान व्रत हमारे समय के एक ऐसे गज़लकार हैं जिन्होंने छोटी बहर में बड़ा से कथ्य कह देने कि पुरजोर कोशिश की है |इस कोशिश में वह कामयाब  भी रहे हैं |छोटी बहर में बड़ी बात कहना वैसे ही है जैसे एक छोटे से फ्रेम में कथ्य का एक विस्तृत आसमान मढ़ दें |बहर के लघु कलेवर में सोच का व्यापक फलक देना गज़लकार की अपनी निजी सामर्थ्य है |शायद इसीलिए विज्ञान व्रत की गिनती उस्ताद शायरों में की जाती है |
एहतराम इस्लाम सुप्रसिद्ध कवि /शायर अध्यक्ष प्रगतिशील लेखक संघ इलाहाबाद 

2-विज्ञान व्रत कि गज़लें समूचे हिन्दी गज़ल साहित्य में अपने ढंग कि अनूठी हैं |यह अनूठापन या विलक्षणता इस बात में है कि उनकी हर गज़ल कहीं न कहीं दूसरी गज़ल से जुड़ाव रखती है |उनकी अधिकांश गज़लें एक ही बहर में कही गई हैं ,और यह बहर बहुत छोटी है |हिन्दी गज़ल के बारे में कविता के आलोचकों का यह एक बड़ा आरोप रहा है कि गज़ल में बातें विस्तार से या मनचाहे ढंग से नहीं कही जा सकती हैं इसके बंधन ऐसा करने की इजाजत नहीं देते हैं |विज्ञान व्रत की गज़लें ऐसे आलोचकों के लिए करारा जबाब हैं |समूची हिन्दी कविता में रामदरस मिश्र के अतिरिक्त घर की उपस्थिति विज्ञान व्रत की गज़लों में सर्वाधिक है | प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप काशी हिंदू विश्व विद्यालय 

3 विज्ञान व्रत हिन्दी के गज़लकारों से अलग छोटी बहरों के बड़े गज़लकार हैं | विज्ञान व्रत की अपने आसपास के परिवेश पर व्यापक नजर होती | घर को लेकर विज्ञान व्रत ने अद्भुत शेर कहे हैं |ये घर इस मायने में अनेकार्थी हैं जिसमें अपने समय में विखरती जा रही घर की सम्वेदनाओं से लेकर वसुधैव कुटुम्बकम के निरंतर छीजते जाते हुए एहसास का स्पंदन दिखाई देता है | डॉ० विनय मिश्र [अलवर राजस्थान ]

4-विज्ञान व्रत हमारे समय के एक महत्वपूर्ण गज़लकार हैं |एक विलक्षण संयोग यह भी है कि विज्ञान व्रत कला के भी अद्भुत चितेरे हैं |इसीलिए उनकी गज़ल कभी पेंटिग हो जाती है तो कभी उनकी पेंटिग गज़ल का रूप धारण कर लेती है | उनकी छोटी बहर की ग़ज़लों में बड़ा कथ्य समाया होता है |सोच का व्यापक फलक लिए उनकी बहर का शिल्प आज के समय को पूरी तरह से अभिव्यक्त कर देता है |इसलिए विज्ञान व्रत की ग़ज़लें हमारे समाज का आइना होकर हमारे सामने आती हैं ,जिसमें हम युग सत्य का बिम्ब देख सकते हैं | यश मालवीय 
विज्ञान व्रत की पेंटिग 

14 टिप्‍पणियां:

  1. internet pe gazal aana bahut hi acha kadam he, isse sabhi logo ko parhne ka mauka milta he...........

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  2. Hindi ghazal ke charchit aur mahatvpoorn rachnakar hain Vigyan Vrat ji, unki panchon hi ghazlen 'Satsaiya ke dohre' sabit hui hain. Bahut-bahut badhai.
    - YOGENDRA VERMA 'VYOM'

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  3. vigyan vrat ji kee marmik abhvyakit kee rachnaon ke liye aap ko badhai

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  4. aabhaar .......खुद से आंख मिलाता है
    फिर बेहद शरमाता है


    jai baba banaras....

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  5. ek aur shanadaar post ke liye bahut aabhar

    paanchon gazal khoob pasand aai aur chitr bhi bahut achche lage

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  6. श्री विज्ञानं व्रत को पढ़ना सुखद अनुभूति सा है .गजल और पेंटिंग दोनों में वे अद्वितीय हैं .आभार

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  7. Vigyan Vrat is an entity unto himself.He has reached a pinnacle with utmost hard work, single - minded determination ,dedication and love .He set his goals high , always dreaming to reach that point where no man dared to use the strokes of his brush or his pen and has managed to fill in colours in both the fields with elan...second to none....kudos to you papa...we're very proud of your work ...though I may not have expressed my appreciation in many words ...but....love you lots...varnika...

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  8. I totally second what my darling sister has written... I have been in awe of how my father has been able to keep his focus despite all the odds that life has thrown at him...
    We are very proud to be YOUR daughters and are thankful for being blessed like this.
    Vanchha

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  9. Meri Had ke saath badhe jo aisaa chaadar dhuMdh rahaa hun.

    Sir, as usual, amazing line, jo mil jaaye wo chaadar to thori mujh sang baaMt lenaa.
    I wish, I can write like you!

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  10. छोटी बहर में ऐसी अनूठी ग़ज़लें ग़ज़लें विज्ञानं व्रत जी ही लिख सकते हैं...आज के दौर में छोटी बहर में उन जैसा लिखने वाला शायद ही कोई दूसरा हो...बेजोड़ अशआर उनकी कलम से निकलते हैं जो सीधे दिल पर असर करते हैं...आम बोलचाल की भाषा में कहे उनके शेर सब को अपनी ही राम कहानी लगते हैं...वो उच्च कोटि के पेंटर भी हैं और शायर भी...उनके बारे में हमें बता कर बहुत बड़ा उपकार किया है आपने.
    नीरज

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  11. sir, your 'ghazal' are lyrical as well as have the spark of philosophical approach, and touches the aspects once important perceptions in life. Reminiscent of yearnings one had during the struggle-full days. Congratulations!!!

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